बसोहली। उपमंडल बसोहली के द्रमण इलाके में बैक टू विलेज कार्यक्रम के दौरान रिसीविंग स्टेशन के लिए रखे गए नींव पत्थर के बाद उसे बनाने का कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है। इसके चलते लोगों में विभागीय अधिकारियों के प्रति रोष जयाया है।
इस रिसीविंग स्टेशन के बनने से शीतलनगर ब्लॉक में बिजली किल्लत, कम वोल्टेज, अघोषित कटौती की समस्याओं से लोगों को छुटकारा मिलना था। लेकिन, रिसीविंग स्टेशन न बनने से अब भी लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं।
शीतलनगर ब्लॉक के बीडीसी अध्यक्ष शंकर सिंह, स्थानीय गुरमेल सिंह, कुलवंत सिंह, सरपंच सुरेंद्र सिंह, नायब सरपंच भूपेंद्र सिंह, आदि ने बताया कि बैक टू विलेज के प्रथम चरण में लोगों ने बिजली किल्लत की समस्याएं अधिकारियों को बताई थीं। जिसे देखते हुए पीडीडी विभाग के कमिश्नर सेक्रेटरी हिरदेश कुमार सिंह ने द्रमण में 28 नवंबर, 2019 को 6.3 एमवीए, का रिसीविंग स्टेशन और 33/11 केवी की लाइन द्रमण, हट्ट माशका, कछीड, सियारा, खड्ढी में बिछाई जानी थीं। नींव रखे हुए करीब दो वर्ष बीत चुके हैं, परंतु अब तक इस रिसीविंग स्टेशन का काम शुरू नहीं हुआ है।
मौजूदा समय में शीतलनगर में स्थित चार एमवीए के रिसीविंग स्टेशन ब्लॉक की करीब 10 पंचायतों, जबकि बनी की तीन पंचायतों जिसमें बांजल, सियारा, करडोह और धार महानपुर की दो पंचायतें गोडल, नगाली में बिजली की सप्लाई होती है। इन सभी पंचायतों की बिजली का भार इस रिसीविंग स्टेशन पर पड़ता है। जिससे कहीं भी फॉल्ट होने, जरा सी हवा चलने पर व तारों के आपस में टकराने से बिजली गुल हो जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा पहले भी कई बार होता आया है। कई जगह नींव पत्थर रखे जाते हैं, परंतु काम में तेजी नहीं लाई जाती। अगर यह रिसीविंग स्टेशन शुरू हो जाता, तो इसका फायदा शीतलनगर ब्लॉक और अन्य सभी पंचायतों को होता। लोगों ने जिला प्रशासन, डिवीजनल कमिश्नर, पीडीडी के कमिश्नर सेक्रेटरी से मांग की है कि जल्द इस रिसीविंग स्टेशन का काम शुरू किया जाए, ताकि लोगों को बिजली किल्लत से छुटकारा मिल सके।