कठुआ। संत निरंकारी सेवा मंडल की ओर से शहर से सटे गांव चक देसा सिंह में विशाल सत्संग का आयोजन किया गया। रविवार को आयोजित सत्संग में मुख्य वक्ता तरसेम लाल मुखी रहे। जिन्होंने सत्संग में उपस्थित मुट्ठी, नगरी और खोख्याल से आई संगत का मार्गदर्शन किया।
अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि गुरु शरीर नहीं अपितु ज्ञान होता है। जीवन में कोई कार्य करना है तो गुरु को शामिल करने करके ही करना चाहिए। क्योंकि गुरु नहीं तो जीवन शुरू नहीं। हम यह जानना होगा कि जब तक ज्ञान नहीं होता तब तक ज्ञान की शुरुआत नहीं होती। ईश्वर का ज्ञान पापी को पाप से शुद्ध कर देता है जो उसे मोक्ष प्राप्त करवा सकता है।
उन्होंने संगत को बताया कि जो ईश्वर को जानकर भक्ति करता है। उसे यह सदैव पता होता है कि उसे जो जीवन मिला हुआ अनमोल है और इसका मकसद भी बहुत सुंदर है। अगर जीवन का मकसद पूरा नहीं होता है। तो हमारा संसार में आना व्यर्थ हो जाता है। लिहाजा हमें जागना होगा, नहीं तो हमारा यह जीवन खाली हाथ चला जाएगा।
उन्होंने कहा कि हर रोज सांसों की गिनती कम होती जा रही है। जिस तरह तीर कमान से निकलकर वापस नहीं आता है। इसी तरह एक बार सांस शरीर से बाहर निकल गई तो वापस नहीं आती है। कई जन्मों के बाद में मनुष्य का शरीर मिला है। यह निरंकार की कृपा है, तभी ऐसा संभव हो पता है। ईश्वर ने हमें भक्ति के लिए बनाया है अगर हमारे पांव सत्संग की ओर बढ़ रहे हैं तो इसका अर्थ यह है कि सद्गुरु हमसे प्रसन्न है और वह हमें परमात्मा का दर्शन करवाने की ओर लेकर बढ़ रहे हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि जीवन का लक्ष्य क्या है, यह हमें गुरु बताता है। अब यह हमें तय करना है कि हम जीवन की बड़ी जीत कर या हार कर यहां से जाना चाहते हैं। अगर हम परमपिता का सानिग्ध्य प्राप्त कर सके, तो यही हमारी जीत होगी। संवाद