हीरानगर। शुक्रवार रात को हुई बारिश से उज्ज दरिया में आई बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। चक छिब्बा, खंदवला, सलाल पुर इलाके में सैकड़ों कनाल भूमि पर धान की फसल को नुकसान हुआ और कई कनाल भूमि कटाव में बह गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया और नुकसान की रिपोर्ट जल्द तैयार करने की बात कही।
कुछ लोग बाढ़ में सुरक्षित स्थान पर घंटों फंसे रहे, जिन्हें जलस्तर कम होने के बाद निकाला गया। लोगों में प्रशासन के खिलाफ गुस्सा देखने को मिला। उन्होंने कहा कि हर बार बरसात में इसी तरह से पानी उनकी फसलों को नुकसान पहुंचाता है, कई बार गुहार लगाने के बावजूद दरिया किनारे बांध बनाने का काम नहीं किया गया।
स्थानीय सरपंच सतपाल भगत ने कहा करीब 5 वर्ष पहले दरिया में आई बाढ़ के कारण बांध बह गया था। उसके बाद हर बार बरसात में दरिया में जैसे ही जलस्तर बढ़ता है पानी लोगों के खेतों में और घरों में घुसता है। पानी के तेज बहाव में कई किसानों की जमीनें भी बह चुकी हैं। उन्होंने कहा भूमि कटाव की वजह से अब तक इस इलाके में करीब 1200 कनाल भूमि बाढ़ में बह चुकी है। इसके अलावा खेतों में पानी भरने से हर साल 300 से 500 कनाल भूमि पर लगी फसल को नुकसान होता है। नंबरदार राजेंद्र शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को आई बाढ़ में करीब 400 कनाल भूमि पर लगी धान की फसल को भारी नुकसान हुआ। कुछ लोगों के घरों में पानी घुस गया।
कई वर्षों से बांध बनाने की मांग कर रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वहीं स्थिति का जायजा लेने पहुंचे मढ़ीन के तहसीलदार लेखराज ने कहा बाढ़ से फसलों को नुकसान हुआ है, लेकिन कितनी फसल को नुकसान हुआ यह जानकारी देना अभी संभव नहीं है। अभी भी कई खेत पानी में डूबे हुए हैं। इस कारण नुकसान का आकलन करने में कुछ समय लगेगा। जल्द ही नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर जिला उपायुक्त को भेजी जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस मौसम में नदी नालों के पास न जाएं।