कठुआ। जिला अस्पताल में मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए एक माह बाद की तारीख मिल रही है। ऐसे में मरीज और तीमारदार परेशान हैं। मजबूरी में उन्हें बाहर के डायग्नोस्टिक सेंटर पर कई गुणा अधिक पैसे देकर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है।
बता दें कि जीएमसी में छह अल्ट्रासाउंड मशीनें हैं लेकिन यहां स्टाफ की भारी कमी है। अल्ट्रासाउंड करने वाले केवल तीन स्पेशियलिस्ट हैं। जीएमसी में रोजाना विभिन्न रोगों से पीड़ित 50 से अधिक मरीज अल्ट्रासाउंड के लिए पहुंच रहे हैं। सुबह 10 से 4 और शाम 4 से रात 10 बजे तक अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं लेकिन प्राथमिकता केवल इमरजेंसी और गर्भवती महिलाओं को ही दी जाती है। ऐसे में अन्य मरीजों को 20 दिन से एक महीने तक का समय दे दिया जाता है। वीरवार को जीएमसी पहुंचे लोगों को 23 फरवरी के बाद का समय दिया गया। लोगों का कहना है कि कोई बीमारी में ही अस्पताल पहुंचता है। अल्ट्रासाउंड में बीमारी का पता चलने में ही एक महीना लगेगा तो इलाज में देरी न हो, इसलिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटर से ही अल्ट्रासाउंड करवाना मजबूरी है।
रेडियोलॉजिस्ट के 10 से अधिक पद रिक्त
जीएमसी कठुआ में रेडियोलॉजिस्ट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, सीनियर रेजीडेंट के 10 से अधिक पद हैं लेकिन मौजूदा समय में केवल एक सीनियर रेजीडेंट ही तैनात है। अन्य पद रिक्त होने के चलते हेल्थ विभाग से एक डिप्लोमा होल्डर सीएमओ और जीएमसी से एक डिप्लोमा होल्डर डॉक्टर को यहां तैनात किया गया है। डिप्लोमा होल्डर सीएमओ और डॉक्टर सुबह 10 से शाम 4 बजे तक अल्ट्रासाउंड करते हैं, जबकि सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर शाम 4 बजे के बाद केवल इमरजेंसी में आए मरीजों का अल्ट्रासाउंड करते हैं। इसके चलते लोगों को जीएमसी में स्थापित छह मशीनों का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
जीएमसी में 120 तो निजी केंद्रों पर चुकाने पड़ते हैं 500 से एक हजार
जीएमसी में अल्ट्रासाउंड की सरकारी फीस 120 रुपये है लेकिन निजी केंद्रों पर लोगों को 500 से एक हजार रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। एक महीना बिना इलाज बीमारी बढ़ने की आंशका के चलते अस्पताल में आने वाले मरीजों को न चाहते हुए भी निजी जांच केंद्रों में जाना पड़ रहा है, जहां उन्हें तीन से चार गुना ज्यादा पैसे खर्च कर जांच करवानी पड़ रही है। इसका सबसे ज्यादा लाभ निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों को हो रहा है।
-पेट की तकलीफ के चलते जीएमसी पहुंचे भगवान दास ने बताया कि वह उप जिला अस्पताल हीरानगर में इलाज के लिए गए थे लेकिन वहां से उन्हें जीएमसी रेफर कर दिया गया। बेहतर उपचार की इच्छा से वह यहां आए लेकिन यहां हालात और बदतर हैं। उन्हें अल्ट्रासाउंड के लिए दो महीने बाद की तारीख दे दी गई है। तकलीफ आज है तो दो महीने बाद जांच करवाने का क्या फायदा। लिहाजा, निजी डायग्नोस्टिक केंद्र जाने के अलावा कोई चारा नहीं है।
-पत्नी का अल्ट्रासाउंड करवाने जीएमसी पहुंचे मोहनलाल का कहना है अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सुविधा केवल भर्ती मरीजों तक ही सीमित रह गई। ओपीडी में आने वाले हर मरीज को एक से दो महीने की तारीख दी जाती है। उनकी पत्नी को एक महीने बाद आकर अल्ट्रासाउंड करवाने का समय दिया गया है। मजबूर होकर उन्हें निजी क्लीनिक जाना पड़ेगा। इसमें उन्हें कई गुणा अधिक पैसे भी खर्च करने होंगे। यह सिर्फ इसलिए किया जा रहा है ताकि निजी सेंटरों से मोटी कमीशन हासिल की जा सके।
इमरजेंसी में हर किसी का अल्ट्रासाउंड तुरंत किया जाता है। कुछ लोगों को एक दो सप्ताह का समय दिया जाता है। दरअसल, अस्पताल में रेडियोलॉजिस्टों की कमी है। इसके लिए उच्चाधिकारियों को डिमांड भेजी गई है। जल्द ही रिक्त पदों को भर कर लोगों को राहत दी जाएगी।
-डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री प्रिंसिपल जीएमसी कठुआ