आईबी से सटे गांव में तीन साल पहले टूटी थी चहारदीवारी, इमारत को पहुंचा था नुकसान
दो कमरों पर ताला, एक से काम चला रहा विभाग, मवेशी करते हैं आराम, मरीज परेशान
हीरानगर। अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर पाकिस्तान से मिले जख्म आज भी नहीं भरे हैं। 2021 में संघर्ष विराम के बाद सीमावर्ती गांवों के हालात तो बदले, लेकिन स्वास्थ्य केंद्रों की हालत नहीं सुधरी। इनके रखरखाव के लिए सरकार या विभाग गंभीर नहीं दिख रहे।
गांव चक चंगा में स्वास्थ्य केंद्र की हालत तबेले जैसी है। संघर्ष विराम से पहले गोलाबारी से चहारदीवारी टूट गई थी। इमारत को भी नुकसान पहुंचा था, लेकिन तीन साल बाद भी मरम्मत नहीं कराई गई। इमारत में तीन कमरे हैं। दो की हालत जर्जर है। स्वास्थ्य कर्मी एक कमरे से काम चला रहे हैं।
स्वास्थ्य केंद्र में लावारिस मवेशियों का जमावड़ा रहता है। इससे बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की उम्मीद लेकर आने वाले मरीज परेशान हो रहे हैं। यहां एक फार्मासिस्ट और दो नर्स सेवाएं दे रही हैं। छोटी-मोटी बीमारी के लिए भी लोगों को जीएमसी जम्मू या अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
सीमावर्ती गांवों में सुविधाओं को लेकर सरकार गंभीर नहीं : गांववासी प्रदीप कुमार ने बताया कि तीन साल पहले गोलाबारी के दौरान स्वास्थ्य केंद्र की चहारदीवारी टूटी थी, लेकिन उसके बाद किसी ने सुध नहीं ली। इमारत की हालत भी जर्जर है। तीन कमरे होने के बावजूद एक में स्वास्थ्य कर्मी काम कर रहे हैं। दो कमरों पर ताले लटके हैं। सीमावर्ती गांवों में सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर नहीं है।
तीन गांवों की करीब 1800 की आबादी स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर: पूर्व सरंपच राकेश चौधरी का कहना है कि चक चंगा, छन टांडा और गंगू चक गांवों की करीब 1800 की आबादी स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है। जीरो लाइन पर बना यह स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सुविधा का जरिया है। प्रदेश में अब चुनी हुई सरकार है, जिससे लोगों को कई उम्मीदें हैं। सरकार को भी इनकी उम्मीदों को पूरा करने के लिए गंभीरता से काम करना चाहिए।
चहारदीवारी की मरम्मत के लिए ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों से बात की थी, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस वित्तीय वर्ष में चहारदीवारी और इमारत की मरम्मत का काम करवाया जाएगा। इसके लिए विभाग के उच्च अधिकारियों से बात की है।
- डॉ. स्वामी शरण, बीएमओ