-कामकाजी महिलाओं को मिलेगी बड़ी राहत, बिना चिंता काम पर जा पाएंगी
- छह महीने से छह साल तक के बच्चों की पालना केंद्र में की जाएगी देखभाल
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले की छह आंगनबाड़ियों को पालना केंद्र (क्रेच) बनाने के लिए सरकार से अनुमति मिल चुकी है। इन पालना केंद्रों को इसी साल से संचालित करने की योजना है। जिसके लिए एकीकृत बाल विकास सेवाएं विभाग तैयारियों में जुट गया है।
इससे न केवल छह महीने से छह साल तक के बच्चों को इन केंद्रों में सुरक्षित वातावरण मिलेगा, बल्कि इससे कामकाजी महिलाओं को बिना चिंता के अपने काम पर जाने में भी सुविधा रहेगी। इसके अलावा इन केंद्रों में बच्चे के पोषण और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं पर भी खास तरह से निगरानी रखी जाएगी। बता दें कि जिले के इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेज (आईसीडीएस) प्रोजेक्ट कठुआ के वार्ड 11, वार्ड चार, वार्ड चार और प्रताप नगर स्थित चार आंगनबाड़ी सेंटरों को पालना केंद्रों के रूप में विकसित किया रहा है। वहीं, हीरानगर के वार्ड चार और चार के दो केंद्रों को भी इस सुविधा से लैस किया जा रहा है।
इन पालना केंद्रों में बच्चों की देखभाल के लिए वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों के अलावा दो अन्य कर्मचारियों की भी नियुक्ति की जाएगी जिसमें एक आया और एक आंगनबाड़ी सहायक का पद होगा। इसके लिए संबंधित विभाग जल्द प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। विभाग के अधिकारियों की मानें तो फिलहाल नए स्थापित किए जा रहे पालना केंद्र महीने के चार रविवार को छोड़कर बाकी के सभी दिन कार्यरत रहेंगे। प्रत्येक पालना केंद्र में 25 बच्चे रखने की सुविधा होगी। ये सुबह नौ से शाम पांच बजे तक खुले रहेंगे।
बच्चों को मिलेगी यह सुविधाएं
इन आंगनबाड़ी केंद्र में विभाग की ओर से बच्चों को खाने-पीने से लेकर उनके आराम सहित खेलने के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। प्रत्येक केंद्र में बच्चों के सोने के लिए पालना की विशेष सुविधा होगी। वहीं, तीन साल की आयु वाले बच्चों के लिए एलईडी सहित खिलौने और अन्य मनोरंजन की चीजें भी उपलब्ध होंगी।
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पालना केंद्रों को स्थापित करने के लिए विभाग की तैयारी जोरो पर चल रही है। जिस भी आंगनबाड़ी केंद्र में जगह की कमी थी, वहां अतिरिक्त जगह की व्यवस्था की जा रही है। पालना योजना की निर्धारित दिशा-निर्देशों के मुताबिक ही सभी सेंटरों में व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा आंगनबाड़ी कर्मचारियों से आसपास के इलाके में लाभार्थियों को चिन्हित करने की भी प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लाभार्थी योजना का लाभ उठा सकें।
-हीकत सिंह, बाल विकास परियोजना अधिकारी कठुआ।