भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों से भले ही बीती रात को ही पलायन शुरू हो गया था लेकिन कई गांव पाकिस्तानी रेंज के ठीक सामने होने की वजह से सैकड़ों कुनबे गांव से हिल तक नहीं सके।
ऐसे में उन्हें रात भर धमाकों की गूंज में जिंदगी और मौत के बीच झूलना पड़ा। सुबह हुई तो जैसे तैसे गांव से निकलकर ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थानों पर पनाह ली।
पाकिस्तानी गोलाबारी के शिकार मनियारी गांव के ग्रामीणों ने बताया कि गांव की मुख्य सड़क पाकिस्तानी रेंजरों के ठीक निशाने पर रहती है। बीती रात गोलाबारी हुई तो उन्हें घरों में दुबकना पड़ा।
प्रशासन और सुरक्षा बलों की तरफ से गांव में कोई नहीं पहुंचा। धमाकों की गूंज से मवेशी अपने रस्से तुड़कवाकर इधर उधर भागते रहे। गुज्जर चक्क के राधे श्याम, नानक सिंह और कुलदीप कुमार ने कहा कि उन्हें रात को पलायन करने का मौका नहीं मिल पाया।
सुबह तक लगातार धमाकों की आवाज आती रही। ऐसे में ग्रामीण संकट से घिर गए थे। बच्चों से लेकर युवा और उम्र दराज लोग दहशत में रहे। गनीमत रही कि मोर्टार धमाकों के बावजूद गांव में जानी नुकसान नहीं हुआ है। सुबह होते ही फायरिंग रुकने पर ग्रामीणों ने गांव से पलायन कर लिया।
इधर आए दिन पाकिस्तान से बरसने वाली गोलों और हालात बिगड़ने पर विस्थापन से गुस्साए ग्रामीणों ने रोष जताया। अंतर्राष्ट्रीय सीमा से बिल्कुल सटे गुज्जर चक्क और मेहराजपुर गांवों में ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आर पार की लड़ाई को मौजूदा हालात से बेहतर बताया।
गुज्जर चक में जहां ग्रामीणों ने पाकिस्तान से बरसाए गए मोर्टार शेल के अवशेष दिखाते हुए विरोध प्रदर्शन किया तो मेहराजपुर में ग्रामीणों ने पूरा इलाका खाली करवाकर पाकिस्तान को करारा जवाब देने की मांग की।
गुज्जर चक के तरसेम लाल सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि सीमा से सटे होने का ग्रामीणों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। आए दिन उन्हें गोलीबारी के बीच जिंदगी की जंग लड़नी पड़ती है। राज्य सरकार के पास सीमावर्ती ग्रामीणों के पुनर्वास के लिए कोई योजना नहीं है।
यही वजह है कि भारत पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे इलाके ग्रामीणों के लिए सिरदर्द बन गए हैं। मेहराजपुर में रशपाल सिंह, धर्म सिंह, बलवान सिंह, हरदेव सिंह और विक्रम सिंह ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों का जीवन अनिश्चितताओं से घिर गया है। कब हालात खराब हो जाएं पता नहीं चलता।
इससे बेहतर है कि सीमा से सटे इलाकों के लोगों का स्थायी रूप से पुनर्वास कर पाकिस्तान से दो-दो हाथ कर लिए जाएं।