- जर्जर इमारत में जान जोखिम में डाल पढ़ने को मजबूर विद्यार्थी
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। एक ओर सदियों पहले बने किले आज भी बुलंद हैं तो दूसरी तरफ दस साल पहले तैयार हुई हाई स्कूल नजोत की इमारत खस्ताहाल हो गई है। 1.28 करोड़ रुपये की परियोजना से स्कूल के लिए इमारत तो बना दी, लेकिन न इसमें दरवाजे हैं, न खिड़कियां और न ही बिजली की व्यवस्था। इमारत खंडहर होने की कगार पर है।
हैरत की बात है कि स्कूल की पुरानी इमारत अपनी मियाद पूरी कर चुकी है उसमें आज भी विद्यार्थी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं। बारिश के दिनों में पानी कक्षाओं के भीतर आने से हालात और भी बदतर हो जाते हैं। विभाग ने एक बार भी इमारत की मरम्मत नहीं करवाई और यह अब रेत का किला बनकर रह गई है।
कहने को तो नजोत में हाई स्कूल है मगर सरकार ने न इसका दर्जा बढ़ाया, न नई इमारत दी और न ही दसवीं कक्षा तक पढ़ाने के लिए शिक्षक। वर्तमान स्थिति यह है कि मिडिल स्कूल का स्टाफ नौंवी और दसवीं की कक्षाएं भी लेता है। स्कूल में ज्यादातर महिला शिक्षक हैं, एक भी मास्टर ग्रेड शिक्षक नहीं है। अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2013-14 में स्कूल की एक इमारत का काम शुरू हुआ, लेकिन किन्हीं कारणों से ठेकेदार अधूरा काम छोड़कर भाग गया। इमारत की फिनिशिंग का काम नहीं हो पाया। इसके बाद धीरे-धीरे यह जर्जर होती चली गई।
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विधायक डॉ. रामेश्वर सिंह ने दिए जांच के आदेश
क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे बनी के विधायक डॉ. रामेश्वर सिंह भी नजाेत स्कूल की हालत को देखकर हैरान रह गए। मात्र 10 साल में नई इमारत की हालत जर्जर है, वहीं दूसरी ओर सदियों पहले बने किले आज भी बुलंद हैं। डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया कि इस इमारत का काम 2017 में ढांचे के निर्माण तक हुआ। 1.28 करोड़ रुपये की परियोजना में से लोक निर्माण विभाग ने ठेकेदार को मात्र 4 लाख छोड़कर सारी धनराशि अदा कर दी। इसके बाद ठेकेदार ने काम ही नहीं किया। न खिड़कियां लगीं, न दरवाजे, न बिजली मिली और न ही दीवारों पर प्लास्टर हुआ। हैरत की बात है कि जब इमारत तैयार ही नहीं थी तो ठेेकेदार को राशि क्यों जारी की गई। इससे साफ है कि विभागीय मिलीभगत भी इसमें रही। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ जांच करवाने के निर्देश दिए हैं।
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कोट
इमारत के अधूरे निर्माण का मामला संज्ञान में आने के बाद लोक निर्माण विभाग से जानकारी ली गई। विभाग के पास 2.29 लाख रुपये की राशि इस परियोजना से संबंधित उपलब्ध थी। इसके बाद उच्च अधिकारियों से बात कर एक बार फिर इमारत के लिए डीपीआर तैयार करवाई गई। फिलहाल काम शुरू नहीं हो पाया है।
चमन लाल, डिप्टी सीईओ बिलावर