जिले में मानसून की पहली बारिश ने ही तबाही मचा दी है। उज्ज, तरनाह, सेवा, रावी समेत जिले के तमाम नाले और नदियां उफान पर हैं। उज्ज की बाढ़ में फंसे 12 लोगों को एसडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू कर सुरक्षित जगह पर पहुंचाया। वहीं बाढ़ में बह रहीं 19 भैंसों को ग्रामीणों की मदद से बचा लिया गया। हालांकि इससे कहीं अधिक मवेशियों के बाढ़ में बहने से लापता होने की जानकारी आ रही है। मौसम विभाग के अनुसार बारिश ने पिछले चालीस वर्षों के रिकार्ड को तोड़ दिया है।
बारिश और बाढ़ से सबसे अधिक नुकसान बनी सब डिवीजन और बिलावर के लोहाई मल्हार में हुआ है। यहां दर्जनों घरों को क्षति पहुंचने की जानकारी है। कई कच्चे घरों को आंशिक नुकसान हुआ है, तो वहीं कई घर जमींदोज हो गए हैं। प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन करने के लिए टीमों को नियुक्त कर दिया गया है।
रविवार रात दो बजे के लगभग जिले के पहाड़ी इलाकों में शुरू हुआ बारिश का सिलसिला कुछ ही घंटों में मैदानी इलाकों में भी पहुंच गया। बनी सब डिवीजन के शीतलनगर और आसपास के इलाकों में 180 एमएम तक बारिश दर्ज की गई है। वहीं बनी कसबे और आसपास के इलाकों में 120 एमएम के लगभग बारिश हुई है। इससे दरिया, नदी और नालों ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। पहाड़ी इलाकों में दर्जनों सड़क संपर्क भंग हो गए हैं। बनी के दूरदराज इलाकों के साथ-साथ सरथल और भद्रवाह का संपर्क भी कट गया है। कई जगह पहाड़ों से खिसक कर पस्सिया सड़क पर आ गई हैं, तो कहीं नालों के उफान पर आने से सड़कों का स्वरूप ही खत्म हो गया है।
कोटी चंडियार में तीन, बैकन में एक घर को पहुंचा नुकसान
भारी बारिश जिले के पहाड़ी इलाकों में आफत बनकर बरसी है। कई गरीब लोगों के आशियाने जहां जमींदोज होने की कगार पर पहुंच गए हैं। वहीं भारी बारिश के बीच बनी के चंडियार इलाके में तीन कच्चे घरों को नुकसान की जानकारी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मोबीन अली, मोहम्मद अशरफ और उसके बच्चों के घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। वहीं बैकन इलाके में चंदू का घर पूरी तरह से भूस्खलन की चपेट में आ गया है।
दस करोड़ के ढांचे बाढ़ में बहे
भारी बारिश के बीच जिले के मैदानी इलाकों में भारी तबाही की वजह उज्ज दरिया बना। रात से ही पहाड़ी इलाकों में मूसलाधार बारिश के बाद पौ फटने के साथ ही उज्ज दरिया का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया। 70 हजार का अलर्ट लेवल पार होने के बाद सुबह छह बजे के बाद से उज्ज का जलस्तर खतरे के निशान एक लाख क्यूसेक को पार कर गया। दोपहर एक बजे से दो बजे के बीच उज्ज का जलस्तर सबसे अधिक एक लाख 36 हजार क्यूसेक दर्ज किया गया। उधर, लगभग दस करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है।
जलस्तर बढ़ने के साथ ही जसरोटा से सटे उज्ज बैराज के गेट खोल दिए गए। दरिया में पानी के बहाव से बैराज के अपस्ट्रीम में लगभग तीन सौ मीटर से अधिक आरटीआईसी के गाइड बंड का हिस्सा बह गया है। बहाव तेज हुए तो पानी ने छब्बे चक और तंगदेवपुरा के नजदीक खेतों में जगह बना ली। भंबडवां गांव के नजदीक तटबंध बहने से गांव में भी पानी भरने का खतरा बढ़ गया था। उधर, तरनाह में भी जलस्तर ढाई फुट के अलर्ट और तीन फुट के खतरे के स्तर को पार कर साढ़े चार फुट तक घंटों बहता रहा।
डीसी राहुल यादव ने कहा कि बाढ़ से पहाड़ी इलाकों में तीन घरों और दो पशुशाला को नुकसान पहुंचा है। घाटी इलाकों में कुछ लोगों को बाढ़ के दौरान रेस्क्यू किया गया है। हाईवे के निचले इलाकों में फसलों को बाढ़ से नुकसान पहुंचा है।