फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kathua News: रंजीत सागर झील में चाेरी से मछली पकड़ने वाले सक्रिय

विज्ञापन
विज्ञापन
कठुआ। जम्मू-कश्मीर के हिस्से वाली रंजीत सागर झील में इन दिनों बड़े पैमाने पर चोरी से मछलियां पकड़ी जा रही हैं। इससे प्रदेश की संपदा जहां खतरे में है, वहीं राजस्व को भी अब तक सवा करोड़ का चूना लग चुका है।
विज्ञापन

शाम ढलने के साथ ही मछली चोरी करने के लिए बड़े पैमाने पर पंजाब से नाव पूरे रंजीत सागर झील को घेर लेती है और रात भर झील से जम्मू कश्मीर के हिस्से से मछलियां पकड़ी जाती हैं। मछली चोरी की मुख्य वजह समय पर रंजीत सागर झील में मछली पकड़ने के टेंडर का न हो पाना है।
झील में वार्षिक स्तर पर होने वाला मछली पकड़ने का ठेका प्रक्रिया यूं तो बीते साल मार्च अप्रैल में ही हो जाता था लेकिन चुनाव के चलते इसमें देरी हुई। उस पर मछली ठेकेदारों ने भी जम्मू कश्मीर के हिस्से वाली झील टेंडर में दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसका फायदा मछली चोर उठा रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर छह बार टेंडर निकाले जाने के बाद भी जम्मू कश्मीर के हिस्से से टेंडर का न होना इसी ओर ईशारा कर रहा है।
विज्ञापन

पंजाब में रंजीत सागर बांध प्रबंधन की ओर से अपने क्षेत्र में मछली निकालने का ठेका दो महीने पहले ही किया जा चुका है।
जम्मू कश्मीर में इसके लिए न्यूनतम एक करोड़ 46 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई है। न्यूनतम राशि में सालाना बढ़त से ठेकेदार इसे मुनाफे का सौदा नहीं मान रहे हैं। उधर, सरकारी रेट के मुताबिक यदि समय पर टेंडर होता तो अब तक प्रदेश सरकार के खाते में एक करोड़ 21 लाख रुपये की राशि आ चुकी होती।
पंजाब में अनुबंध चल रहा है, जबकि जम्मू कश्मीर का अनुबंध खत्म होने के बाद मछली पालन विभाग भी इतने बड़े जलाशय को नियंत्रण में रखने में कामयाब नहीं हो पा रहा है।
स्थानीय मछुआरों के अतिरिक्त पंजाब के मछुआरे भी धड़ल्ले से रावी दरिया के इस हिस्से से मछली दोहन का काम कर रहे हैं।
खुली लूट मची है, जिसे रोकने के लिए विभाग के पास पर्याप्त स्टाफ तक उपलब्ध नहीं है। प्रदेश की संपदा की लूट को रोकने के लिए यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो विभाग की ओर से झील में डाले गए मछलियों के बीज भी मछली चोर हड़प जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें