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Kathua News: फसलों का मुआवजा न मिलने पर भड़के किसान

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अगस्त में आई बाढ़ और भारी बारिश से बर्बाद फसलों का मुआवजा न मिलने से आक्रोशित किसानों ने बुधवार को कठुआ में जोरदार प्रदर्शन किया। जम्मू-कश्मीर किसान तहरीक के बैनर तले लामबंद किसानों ने जिला प्रशासन और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने केसीसी कर्ज माफी और धान खरीद में लूट के मामले को प्रमुखता से उठाया और इसकी जांच की मांग की।
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जिला अध्यक्ष बनारसी दास के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि बादल फटने और बाढ़ से मक्की और धान की फसलें भारी मात्रा में बर्बाद हो गईं, लेकिन अभी तक उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला है। मुआवजे के अभाव में किसानों को अगली फसल लगाने में गंभीर समस्या आ रही है।
किसान नेता हरि सिंह ने आरोप लगाया कि धान खरीद केंद्रों पर किसानों को लूटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि धान की सफाई के लिए 50 रुपये प्रति क्विंटल तय किए गए थे, लेकिन किसानों से 70 रुपये से भी अधिक की वसूली की गई। किसानों ने इसकी उच्च स्तरीय जांच करवाने और अतिरिक्त वसूली गई रकम वापस लौटाने की मांग की है।
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प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में किसानों की किसान क्रेडिट कार्ड ऋण माफी भी शामिल है। किसानों का तर्क है कि जब 30 से 70 प्रतिशत फसल बर्बाद हो चुकी है, तो वे कर्ज चुकाने में असमर्थ हैं। किसानों ने गेंहू की फसल के लिए डीएपी खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग भी की है। प्रदर्शन में बाबू राम, कुलदीप कुमार सहित दर्जनों किसान उपस्थित रहे।

गेंहू के लिए डीएपी खाद न मिलने पर किसानों में रोष

किसानों की मांग है कि गेंहू की फसल बुआई के लिए किसानों को पर्याप्त डीएपी खाद नहीं मिल रहा है। अगर कहीं खाद मिल भी रहा है तो डीलर उनको नैनो यूरिया खरीदने के लिए दबाव बना रहे है। उनका आरोप है कि किसानों की फसल योग्य भूमि बाढ़ से आई रेत और बजरी से पहले ही बंजर बन चुकी है। ऐसे में अगर किसानों को समय पर खाद नहीं मिला तो वे अपनी फसल कैसे लगा सकते है।

बाढ़ से तबाह हुए खैर वृक्षों को बेचने की मिले अनुमति

किसानों की जिला प्रशासन से मांग है कि कंडी और पहाड़ी इलाके से भारी बाढ़ और भूस्खलन से किसानों के सैंकड़ों खैर के वृक्ष और दूसरे पेड़ तबाह हो गए है। लिहाजा किसानों को अनुमति दी जाए की अपनी तबाह उपज को बेच सके। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे और इसकी जिम्मेदार जिला प्रशासन खुद होगी।
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