- राष्ट्रीय दूध दिवस पर विशेष लोगो लगाएं
- 827 मिली लीटर प्रति व्यक्ति जिले में दूध की उपलब्धता
- सरकारी योजनाओं और डेयरी के प्रति बढ़ी रुचि
साहिल खजूरिया
कठुआ। प्रदेश में इंटीग्रेटिड डेयरी विकास योजना से किसानों और गो पालकों में डेयरी के प्रति बढ़े रुझान से जिले में दूध उत्पादन की दशा पांच सालों में बेहतर यानी लगभग दोगुनी हो गई है। गर्मी के सीजन में कठुआ के मैदानी इलाकों में रहने वाला दूध का संकट भी अब कम हो गया है।
वर्ष 2019-2020 में जहां जिले में 1200 लाख लीटर दूध का उत्पादन सरकारी आंकड़ों में दर्ज किया गया था, वहीं बीते वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक यह बढ़कर 2241.70 लाख लीटर पहुंच गया है। कठुआ जिले की सात लाख आबादी में प्रति व्यक्ति 827 मिली लीटर दूध की उपलब्धता वर्तमान में पहुंच गई है। जो पांच वर्ष पहले के मुकाबले दोगुनी है। जिले में वर्तमान में दो लाख पांच हजार के लगभग गायें और 70 हजार भैंसें पशुपालकों की ओर से पाली जा रही हैं।
खास बात यह है कि पिछले पांच वर्ष में पशु पालकों का रुझान बेहतर किस्म और बढि़या गुणवत्ता का दूध देने वाली गायों की ओर भी बढ़ा है। पिछले दो साल में विभाग ने जहां साहिवाल नस्ल की गाय के दूध की गुणवत्ता के प्रति गो पालकों का जागरूक किया है। विभाग के मुताबिक इसमें दूध उत्पादन बेहतर है, ए वन प्रोटीन है और यह बीमारियों से लड़ने में भी मदद करता है। इसके अलावा जर्सी और एचएफ को भी जिले के किसान खूब पसंद कर रहे हैं। एचएफ नस्ल से रोजाना 50 से 60 लीटर तक दूध हासिल किया जा सकता है। ऐसे में दूध उत्पादक बेहतर आय के लिए इसे प्राथमिकता देते हैं।
पांच ऑटोमेटिक मिल्क कलेक्शन सेंटर ने काम शुरू किया
पिछले कुछ वर्षों में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं का सीधा असर प्रदेश के पहले जिले कठुआ में भी देखने को मिला है। यहां न सिर्फ दूध का उत्पादन पूर्व के मुकाबले बढ़ा है बल्कि इस व्यवसाय को लेकर नए स्टार्ट अप और स्वयं सहायता समूहों की रुचि भी काफी बढ़ गई है। मुख्य पशुपालन अधिकारी युगल किशोर ने बताया कि एचएपीडी के तहत हाल में आठ ऑटोमेटिक मिल्क कलेक्शन सेंटर मंजूर किए गए हैं। जिनमें से पांच के लगभग ने काम करना भी शुरू कर दिया है। खास तौर से बनी, बसोहली और बिलावर आदि के सेल्फ हेल्प ग्रुप इसके लिए आगे आए हैं।
एक करोड़ से लेकर चार करोड़ तक सब्सिडी होती है हासिल
बल्क मिल्क कलेक्शन के लिए भी काम किया जा रहा है। इसकी क्षमता पांच हजार लीटर प्रतिदिन है। इसमें से एक मढ़ीन के पास शुरू हो चुका है जबकि दूसरा नगरोटा लाखड़ी में भी जल्द शुरू हो जाएगा। बताया कि सरकार की ओर से डेयरी फार्मिंग को लेकर ब्रीड मल्टीप्लीकेशन फार्म की एक योजना चलाई जा रही है। इसके तहत 50 से 200 तक मवेशी दिए जाते हैं। इसमें एक करोड़ रुपये सब्सिडी से लेकर चार करोड़ तक सब्सिडी किसानों को बतौर प्रोत्साहन हासिल होती है। खास तौर से प्रदेश में जनजातीय आबादी को भी डेयरी फार्मिंग के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया जा रहा है।