- हीरानगर उपमंडल में ओवरहेड टैंक और ट्यूबवेल का काम पूरा होने के बाद पानी को तरस रहे लोग
अरूण खजूरिया
अरूण खजूरिया
हीरानगर। जल जीवन मिशन (जेजेएम) योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या को खत्म करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ओवरहेड टैंक, ट्यूबवेल और पाइपलाइन बिछाने पर भारी खर्च करने पर भी धरातल पर स्थिति चिंताजनक है।
अब भी हीरानगर उपमंडल के कई गांव स्वच्छ और नियमित पानी की सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। जल जीवन मिशन, जिसकी शुरुआत 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी का लक्ष्य 2024 तक हर ग्रामीण घर तक नल से सुरक्षित पेयजल पहुंचना था।
मगर अब तक ज्यादातर गांव के लोगों के घर नल से जल नहीं पहुंचा है। हीरानगर उपमंडल में करीब 56 नए ट्यूबवेल जल जीवन मिशन के तहत बनने हैं, जिनमें से 49 का काम पूरा हो गया है। इसी तरह करीब 65 ओवरहेड टैंक बनने हैं जिनमें से 50 का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। मगर जहां काम पूरा हो चुका है वहां भी लोगों को पानी की सप्लाई नहीं मिली है।
ओवरहेड टैंक बनकर तैयार हो चुका है और ट्यूबवेल भी बन चुका है। मगर अब तक यहां से एक बूंद भी पानी की सप्लाई लोगों को नहीं हुई है। इनका काम पूरा हुए करीब 6 महीने से अधिक का समय हो गया है, लेकिन लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा नहीं मिली है।
रोमी शर्मा, निवासी छन्न दित्याल
गांव में तो पहले ही ओवरहेड टैंक और ट्यूबवेल बना है, लेकिन पर्याप्त पानी देने में सक्षम नहीं है। इस इलाके में पानी की समस्या के समाधान के लिए छपाकि और खनवाल में ओवरहेड टैंक और ट्यूबवेल का काम जेजेएम के तहत शुरू किया गया था, जो पिछले कई महीनों से पूरा हो गया है, लेकिन अभी तक यहां से पानी सप्लाई नहीं हुई है।
सोहन सिंह, निवासी लदवाल
कोट
जहां ओवरहेड टैंक बन चुके हैं वहां ट्यूबवेल बनाने का काम जारी है। जहां यह काम पूरा हो चुका है वहां 8 से 10 ऐसे इलाके होंगे, जहां फिलहाल सप्लाई शुरू नहीं हुई है, क्योंकि वहां मशीनरी लगाने का काम अभी भी चल रहा है। अन्य जगहों पर सप्लाई शुरू हो गई है।
- सुरिंदर सिंह, एईई जल शक्ति विभाग