राष्ट्रीय उच्चतम शिक्षा अभियान के तहत जल्द ही कठुआ में इंजीनियरिंग कॉलेज उपलब्ध होने वाला है। तीन मंजिल इमारत का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। जेकेपीसीसी के अधिकारियों की मानें तो इमारत की दो मंजिलों की छत डाल दी गई है और आने वाले तीन महीने के भीतर ही चार छत पूरे हो जाएंगे, जिसके बाद इमारत का बाकी काम मार्च 2018 से पहले पूरा कर लिया जाएगा।
कठुआ में बारहवीं की परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थियों के लिए खुशखबरी यह भी है कि कठुआ इंजीनियरिंग कॉलेज की कक्षाएं इसी साल शुरू हो जाएंगी। सूत्रों की मानें तो इमारत का काम पूरा होने तक कक्षाएं जीसीईटी जम्मू में चलाई जा सकती हैं। चूंकि वहां अध्यापकों के साथ-साथ लैब की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। यदि ऐसा हुआ तो भी इस बार एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों की अगले सत्र की कक्षाएं कठुआ से लगना मुनासिब हो जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक आने वाले कुछ ही दिन प्रधानाचार्य की नियुक्ति के साथ-साथ चलाई जाने वाली स्ट्रीमों पर भी फैसला लिया जा सकता है, जिसमें मेकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रानिक्स, कंप्यूटर एप्लीकेशन्स और सिविल इंजीनियरिंग के कोर्स भी शामिल किए जा सकते हैं।
उच्च अधिकारियों की मानें तो नई स्ट्रीम के फैसले के साथ ही यह फैसला लिया जाना जरूरी है कि कठुआ इंजीनियरिंग कॉलेज को मान्यता किस विश्व विद्यालय से दी जानी है। जिला उपायुक्त रमेश कुमार ने बताया कि निर्माण कार्य की जिला प्रशासन भी मोनीटरिंग कर रहा है और कोशिश की जा रही है कि जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा करवा लिया जाए।
26 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा कॉलेज
जंगलोट मोड़ पर बनाए जा रहे यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस और केंद्रीय विद्यालय की इमारत के बीच की भूमि पर इसी साल की शुरुआत से इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। जेकेपीसीसी के प्रबंधक रवींद्र मंसोत्रा ने बताया कि कॉलेज को 70 हजार स्क्वायर फीट के क्षेत्र में तैयार किया जा रहा है। 26 करोड़ की लागत से बनने वाले इंजीनियरिंग कॉलेज को जेकेपीसीसी जल्द से जल्द तैयार करने के लिए काम कर रही है और मार्च 2018 तक यह पूरी तरह से तैयार हो जाएगा।
केंद्र सरकार के उच्च शिक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाला कठुआ इंजीनियरिंग कॉलेज को जीसीईटी जम्मू की ही तर्ज पर तैयार किया जा रहा है। आने वाले दस से पंद्रह दिन के भीतर स्थिति साफ हो जाएगी कि कौन-कौन से स्ट्रीम कठुआ इंजीनियरिंग कॉलेज में उपलब्ध रहेगी। नए सत्र से एडमिशन और कक्षाएं कहां चलाई जानी है। इसपर भी फैसला श्रीगनर में सचिवालय खुलने के साथ ही होना संभव है।
-तारिक अहमद जरगर, निदेशक, राष्ट्रीय उच्चतम शिक्षा अभियान