कठुआ। जम्मू कश्मीर विधानसभा के दूसरे चरण में होने वाले मतदान में कठुआ में विस्थापित होकर बसे 40 कश्मीरी पंडितों ने अपनी आहुति डाली है। वे मतदान को लेकर काफी उत्साहित थे।
बुधवार को विस्थापित जम्मू कठुआ के बीच विशेष एसआरटीसी बस सेवा से डिग्याना में बनाए गए विशेष मतदान केंद्र में अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए रवाना हुए। जम्मू कश्मीर सरकार का गठन करने के लिए लंबे समय के बाद अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर मिलने के बाद बस में सवार मतदाताओं में अजब सा उत्साह देखने को मिला। बस में सवार होकर अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए जा रहे वरिष्ठ मतदाता रमेश जारू ने कहा कि तीन दशक के बाद उन्हें मतदान करने का अवसर मिला है, जिससे उन्हें अहसास हुआ कि वे भी जम्मू कश्मीर के नागरिक हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे ही हाल उनके साथ मतदान करने के लिए आए अन्य लोगों का है, जो बिना किसी भय के मतदान कर जम्मू कश्मीर की सरकार को बनाने में अपना योगदान दे रहे है। इसमें 10 महिलाएं और नौ ऐसे मतदाता हैं, जिन्हें अपने जीवन में यह मौका पहली बार मिला है।
भगवान श्री परशुराम चौक से मतदाताओं को रवाना करने पहुंचे संजय कुमार ने बताया कि उन्होंने गत 18 सितंबर को मतदान किया था। आज हब्बाकदल, लाल चौक और छन्नकोड़ा से विस्थापित हुए उनके लोग मतदान करने के लिए जम्मू जा रहे हैं। यह समय उनके लिए किसी त्योहार से कम नहीं है क्योंकि इससे पहले वर्ष 2006 में हुए चुनाव में उन्हें पोस्टल बैलेट के साथ मतदान करने का अवसर दिया गया था लेकिन तब न तो कोई प्रत्याशी उनके पास आया था और न ही उन्हें वहां कौन प्रत्याशी है, इसकी जानकारी थी। इस बार प्रत्याशी उनके घर तक आए हैं। लिहाजा उनमें भी अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए काफी उत्साह है।