कठुआ। 160 किलोमीटर लंबी गुरदासपुर-जम्मू तवी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना पर तेजी से काम शुरू होने जा रहा है। गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) की ओर से पहले चरण में जम्मू तक इस पाइपलाइन को बिछाने का काम किया जा रहा है।
जम्मू कश्मीर में छह सेक्नलाइजिंग वाल्व तैयार किए जा रहे हैं। ये वॉल्व कठुआ जिले में तीन, सांबा जिले में दो और एक जम्मू जिले में होगा। गेल की ओर से कठुआ, सांबा, विजयपुर और बिश्नाह में सेक्नलाइजिंग वॉल्व तैयार करने के लिए जमीन खरीद की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। 522 करोड़ की राशि से जारी तैयार हो रही यह पाइपलाइन जम्मू और फिर कश्मीर में पर्यावरण के अनुकूल ईंधन का परिवहन करेगी और इसकी शुरुआती क्षमता कम से कम दो मिलियन मानक क्यूबिक मीटर प्रतिदिन होगी। इस परियोजना को चरणबद्ध घाटी तक पहुंचाने की योजना है।
गैस अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की ओर से दिल्ली कटड़ा एक्सप्रेस वे के पास 75 मीटर बाई 75 मीटर के एक एक प्लाट कठुआ के त्रेहड़ा, शहर टिंबर, फ्लोट और कटली चक गिरधारी, रामनगर में खरीदे जा रहे हैं। इसके अलावा नेशनल हाईवे 44 पर सांबा के विजयपुर में सलमेड़ी, पखेडी बंगला में भी एक प्लाट और 100 मीटर बाई 100 मीटर का एक प्लाट बिश्नाह के चक मियां साहिब सिंह, कुलवाल, नजवाल, सरोर में खरीदने को लेकर अधिसूचना जारी की गई है। यह जम्मू रिंग रोड के पास होगा। प्रदेश प्रशासन की ओर से कठुआ और हीरानगर तहसील में दो जगह गेल को इस सेक्नलाइजिंग वाल्व के लिए उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
गेल के एक अधिकारी ने बताया कि यह परियोजना विभिन्न चरणों में पूरी की जानी है। इसमें वर्तमान ढांचों को हटाए जाने से लेकर सिविल कार्य शामिल हैं। इसके साथ ही मैकेनिकल कार्य भी शुरू हो जाएंगे। प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा देकर पाइपलाइन पंजाब और जम्मू और कश्मीर में प्राकृतिक गैस बाजार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है। इससे गैस आधारित उद्योगों के लिए अवसर पैदा होंगे, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलता है। ज्ञात रहे कि वर्ष 2021-22 के केंद्रीय बजट में जम्मू-कश्मीर को गैस पाइप लाइन योजना की सौगात मिली थी। हालांकि 2011 में बठिंडा से जम्मू और श्रीनगर के लिए गैस पाइप लाइन का काम शुरू किया गया था लेकिन कई रुकावटों से यह परियोजना परवान नहीं चढ़ सकी।
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एलपीजी के मुकाबले प्राकृतिक गैस सस्ती पड़ती है और यह उससे अधिक सुरक्षित है। हवा से हल्की होने के कारण लीक होने पर भी यह हवा के ऊपर चली जाती है, जबकि एलपीजी हवा से भारी होने के कारण नीचे आ जाती है। गैस पाइप लाइन प्रोजेक्ट से जुड़ने वाले प्रदेश के जिलों में 24 घंटे गैस की आपूर्ति होती है। घर-घर कनेक्शन के साथ मीटर लगेंगे। इसमें जरूरत के मुताबिक गैस इस्तेमाल की जा सकेगी। चुनिंदा शहरों के अलावा औद्योगिक क्षेत्रों और अन्य व्यावसायिक प्रयोग के लिए यह परियोजना बेहतर महत्वपूर्ण है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर में इस योजना के तहत 27 लाख लोगों को गैस पाइप लाइन से लाभान्वित करने का लक्ष्य है।