कठुआ। ओवरलोड बसों में छात्राओं को छेड़खानी का डर सताता है। बसों में क्षमता से कहीं ज्यादा सवारियां होने का फायदा युवक उठाते हैं। यह बात वीरवार को महिला डिग्री कॉलेज में करवाए गए ''बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ'' कार्यक्रम के दौरान एक छात्रा ने जिला उपायुक्त के सामने कही।
समाज कल्याण विभाग कठुआ की ओर से महिला डिग्री कॉलेज में तीन दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इसमें जिला उपायुक्त बतौर मुख्य मेहमान पहुंचे थे। इस दौरान उपायुक्त ने छात्राओं से सुझाव मांगे तो छात्रा ने बताया कि वह बस में बैठकर रोजाना कॉलेज आती है। इस दौरान आने वाली सभी बसें ओवरलोड होती हैं। बसों में सवार युवक भीड़ का फायदा उठाने का प्रयास करते हैं। छात्रा की बात सुनकर जिला उपायुक्त ने कहा कि यह अच्छा सुझाव है। इसका निवारण करने के लिए बसों की सीटों को छात्राओं के लिए रिजर्व कर दिया जाएगा ताकि उन्हें ऐसी परिस्थिति का सामना ना करना पड़े।
छात्राओं के साथ-साथ माता-पिता को भी जागरूक करे प्रशासन
एक अन्य छात्रा ने उपायुक्त को कहा कि वह कई बार ऐसे कार्यक्रमों में शामिल हो चुकी है लेकिन जब घर जाकर माता पिता को किसी के द्वारा की गई अभद्रता के बारे में बताया जाता है तो बेटियों को ही बातें सुननी पड़ती हैं। छात्रा ने सुझाव दिया कि छात्राओं के साथ-साथ उनके माता-पिता को भी जागरूक किया जाए। छात्रा के सुझाव पर डीसी ने सहमति जताई और कहा कि इस सुझाव पर भी विचार किया जाएगा।
लैंगिक समानता को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण : डीसी
कठुआ। लैंगिक समानता के बारे में संवेदनशील बनाने और जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ पर तीन दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन डीसी कठुआ राकेश मिन्हास ने किया।
इसमें कविता, संगीत, महिला सशक्तीकरण पर नाटक, पैनल चर्चा और उपलब्धि हासिल करने वाली महिलाओं का अभिनंदन जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। इस अवसर पर डीसी ने प्रतिभागियों की सराहना की और इस बात पर जोर दिया कि लड़कियों को सशक्त बनाने के लिए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम का प्रभावी कार्यान्वयन हमेशा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। डीसी ने कहा कि सतत विकास में तेजी लाने के लिए लैंगिक समानता को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है। उन्होंने लड़कियों को शिक्षित करने और सशक्त बनाने के लिए सरकार द्वारा की गई विभिन्न पहलों पर प्रकाश डाला ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे हर मामले में लड़कों के बराबर हों। इसके अतिरिक्त, प्रमुख शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की पैनल चर्चा ने महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने में आने वाली चुनौतियों और समान अवसरों के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रिंसिपल सावी बहल ने कहा कि कॉलेज विभिन्न पहलों के माध्यम से लड़कियों को सशक्त बनाने और उन्हें अपने कौशल को निखारने के लिए एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। एचओडी हिंदी विभाग मुकेश कुमारी ने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम भारत सरकार की एक प्रमुख पहल, लैंगिक समानता और बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।