फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kathua News: सालाना शिक्षा कैलेंडर की आधी भी नहीं लग पा रही कक्षाएं

Wed, 29 Jan 2025 01:24 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
विज्ञापन
विज्ञापन
- अतिरिक्त जिम्मेदारियों के बोझ तले दब रहे शिक्षक और बच्चों की पढ़ाई
विज्ञापन

- दूरदराज इलाके के स्कूलों की स्थिति और भी बदहाल

कठुआ। जिले में शिक्षा के अलावा अतिरिक्त बोझ से दबे शिक्षक, औसतन आधे शिक्षा कैलेंडर की कक्षाएं भी विद्यार्थियों को नहीं दे पा रहे हैं। सबसे ज्यादा हालात ग्रामीण इलाकों में बदतर हैं। प्राइमरी और मिडिल स्कूल पर दर्जनों स्कूल ऐसे हैं, जिनमें एक या दो शिक्षकों के सहारे पूरा स्कूल चलता है।
ऐसे में एक शिक्षक को यदि प्रशासन किसी अन्य गतिविधि में लगाता है तो कई बार दूसरे शिक्षक के उपलब्ध न होने पर स्कूलों में ताला तक लटक जाता है। 12 शिक्षा जोन में बंटे जिले में लिपिकों और अन्य कर्मचारियों का अभाव बड़ी समस्या बनकर सामने आ रही है। यहां पहले ही तैनात किए जाने वाली शिक्षकों की संख्या पूरी नहीं है। ऐसे में स्कूल में मौजूद शिक्षकों को चुनाव, जनगणना, पोलियो अभियान और अन्य सरकारी योजनाओं का कार्यान्वयन जैसे गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। इस कारण शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है।
विज्ञापन

स्कूलों में अपनी सेवा देने वाले शिक्षकों की मानें तो बेहतर शिक्षा के माध्यम से आर्थिक विकास, सामाजिक सुधार, स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार, राजनीतिक स्थिरता और वैज्ञानिक व तकनीकी प्रगति जैसे बड़े बदलाव शिक्षा के माध्यम से ही लाए जा सकते हैं। मगर इस राह में जो अड़चनें हैं उन्हें ठीक करने की जरूरत है।


सरकारी आंकड़ों की मानें तो जिले के 1442 स्कूलों में 51 हायर सेकेंडरी की स्थिति कुछ हद तक ठीक कही जा सकती है। मगर शेष प्राइमरी, मिडिल और हाई स्कूलों की स्थिति ऐसी है कि कहीं शिक्षक नहीं तो कहीं नहीं, ऐसे में हालात में गुणवत्ता में गिरावट आती है और बच्चे प्रारंभिक ज्ञान, जैसे अपना नाम लिखना और गणित के साधारण जोड़-घटाना, नहीं सीख पाते हैं।

वहीं, जिले में 12 जोनल शिक्षा अधिकारियों के न केवल पद खाली पड़े हैं, बल्कि वहां काम करने के लिए लिपिकीय वर्ग के कर्मचारियों का अभाव है। ऐसे हालात में संबंधित जोन के स्कूलों से शिक्षकों को कार्यालय के काम के लिए लगा दिया गया है। इसका खामियाजा स्कूलों में आने वाले विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
कोट

शिक्षकों की कमी और तैनात शिक्षकों को अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने की पुरानी परंपरा रही है। इस कारण स्कूलों में शिक्षा का प्रभावित होना स्वाभाविक है। जिला शिक्षा अधिकारी सहित स्कूली शिक्षा निदेशक और जम्मू-कश्मीर सरकार के प्रधान सचिव तक से मुलाकात की जा चुकी है। मगर शिक्षक संगठन के मुद्दे पर अब तक सकारात्मक पहल नहीं की गई है।
- अमरनाथ ठाकुर, शिक्षक नेता

गैर-शिक्षण कार्यों के चलते पढ़ाई की गुणवत्ता में गिरावट आती है। इसको देखते हुए उस्ता विभिन्न मंचों पर आवाज उठाने के साथ शिक्षा विभाग की बैठकों और मीडिया के माध्यम से भी अपील कर चुका है। लेकिन न तो सरकार और न ही विभाग इस मामले में गंभीर है। ऐसे में समस्या जय की तस बनी हुई है। सरकार अगर सरकारी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता को बढ़ाना चाहती है तो स्कूलों में तैनात शिक्षकों की जिम्मेदारी का निर्वहन करने दिया जाए।
विज्ञापन

- रूप चंद शर्मा, महासचिव उस्ता

शिक्षक संगठन इस समस्या को हल करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। पहले ही स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों को भरा नहीं जा सका है। ऐसे में अगर कुछ शिक्षक मौजूद भी हैं तो उनको गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों को दिया जाना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
- सुभाष चंद्र शर्मा, प्रवक्ता जम्मू कश्मीर टीचर्स फोरम
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें