- अदालत से का लोगो लगाएं
-एक में ऑनलाइन सूट खरीद में हुई ठगी तो दूसरा वाइस क्लोनिंग का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। ऑनलाइन धोखाधड़ी के दो अलग-अलग मामलों में फ्रीज खातों से पैसा जारी करने के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आदेश दिया है। जालसाजों ने दो मामलों में एक लाख एक हजार 500 रुपये की ठगी की थी।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने संबंधित बैंकों से फ्रीज की गई राशि को उचित प्रक्रिया को पूरी करने के बाद शिकायतकर्ताओं के खाते में ट्रांसफर करने का आदेश जारी किया है। एक मामला ऑनलाइन खरीदारी में धोखाधड़ी का है तो दूसरा वाइस क्लोनिंग के जरिए पैसे ठगने का है। अभियोजन पक्ष के वकील अंकुश शर्मा ने बताया कि पहला मामला हीरानगर क्षेत्र के परेनी गुड़ा मुंडियां का है। इसमें आनलाइन ठगी में जालसाजों ने अभिषेक शर्मा पुत्र बोध राज को अज्ञात व्यक्ति से फोन काल किया। जिसमें ठग ने शिकायतकर्ता को उसका रिश्तेदार बताया। कहा कि वह अमेरिका में रहता है और उसे 96 हजार 80 रुपये की राशि की जरूरत है।
शिकायतकर्ता ने उसे राशि यूपीआई के माध्यम से ट्रांसफर कर दी। इस बीच शिकायतकर्ता ने इसके बारे में अपने पिता से पुष्टि की तो पाया कि वह एक जालसाज था न कि उसका कोई रिश्तेदार। इसके बाद ठगी की सूचना जिला साइबर सेल में दर्ज करवाई। शिकायतकर्ता ने बताया कि राशि एचडीएफसी बैंक खाता शाखा दियाला चक कठुआ से एचडीएफसी बैंक शाखा तुलसियानी चैंबर्स-नरीमन प्वाइंट मुंबई में जमा की गई थी। साइबर सेल ने अपनी कार्रवाई करते संबंधित बैंक में ट्रांसफर हुई राशि को फ्रीज कर दिया था।
दूसरा मामला मामला बनी क्षेत्र का है। इसमें मेहनाज अख्तर पत्नी मुजफ्फर हुसैन निवासी लोवांग बनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सूट देखा और उसकी खरीदारी करने ऑर्डर किया। शिकायतकर्ता ने 5500 रुपये जेके बैंक शाखा बनी से एसबीआई बैंक शाखा तेइपुर सोनितुर असम में ट्रांसफर कर दिए। जब फोन कर ऑर्डर के बारे में पूछा गया तो जालसाज ने कोई ट्रैकिंग नंबर नहीं दिया और शिकायतकर्ता के फोन को ब्लाक कर दिया। इसके बाद उन्होंने जिला साइबर सेल में मामला दर्ज करवाया। जिला साइबर सेल ने तुंरत कार्रवाई करते हुए राशि को संबंधित बैंक में फ्रीज करवा दिया।
मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट मुनीश कुमार मन्हास ने 18 अक्टूबर को आदेश जारी कर एचडीएफसी बैंक शाखा तुलसियानी चैंबर्स-नरीमन प्वाइंट मुंबई और एसबीआई बैंक शाखा तेइपुर सोनितुर असम को उचित प्रक्रिया पूरी करने के बाद फ्रीज राशि आवेदकों के खातों में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है।