कठुआ। अयोध्या धाम में श्री रामलला की स्थापना के उपलक्ष्य में शहर के लोअर शिवानगर स्थित आदियोगी गुरु आश्रम में श्रीराम कथा का आयोजन जारी है। कथा के दूसरे दिन भारी बारिश के बावजूद पंडाल में मौजूद भक्तों ने भाग लेकर कथाव्यास आदियोगी गौतम जी महाराज के प्रचवनों का श्रवण किया। इस दौरान उनके द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले मधुर भजनों पर संगत मंत्रमुग्ध होकर झूमती दिखी।
रविवार को कथा के दौरान कथाव्यास ने भगवान शंकर और माता पार्वती सहित कुंभराज ऋषि के पास जाकर राम कथा का श्रवण करने का वर्णन करने का वृत्तांत सुनाया। उन्होंने ऋषि विश्वामित्र और यज्ञवल्क्य ऋषि के बीच में हुई वार्तालाप एवं राम नाम का वर्णन सुनाते हुए कहा कि भगवान शिव कैलाश में दिन-रात राम-राम कहा करते थे। इससे माता सती के मन में जिज्ञासा उत्पन्न हो उठी। उन्होंने अवसर पाकर भगवान शिव से प्रश्न किया कि आप राम-राम क्यों कहते हैं। यह राम कौन हैं। इस पर भगवान शिव ने उत्तर दिया कि राम आदि पुरुष हैं। स्वयंभू हैं, मेरे आराध्य हैं। सगुण भी हैं, निर्गुण भी हैं। यह माता सती के कंठ के नीचे नहीं उतरा और वह सोचने लगीं कि अयोध्या के नृपति दशरथ के पुत्र राम आदि पुरुष के अवतार कैसे हो सकते हैं। वह तो आजकल अपनी पत्नी सीता के वियोग में दंडक वन में उन्मत्तों की भांति विचरण कर रहे हैं। वृक्ष और लताओं से उनका पता पूछते फिर रहे हैं। यदि वे आदि पुरुष के अवतार होते तो क्या इस प्रकार आचरण करते। लिहाजा माता सती के मन में राम की परीक्षा लेने का विचार उत्पन्न हुआ। वह माता सीता का रूप धारण करके दंडक वन में राम के सामने प्रकट हुईं। भगवान राम ने माता सती को सीता के रूप में देखकर कहा कि हे माता आप एकाकी यहां वन में कहां घूम रही हैं। हमारे बाबा विश्वनाथ कहां हैं। राम का प्रश्न सुनकर सती से कुछ उत्तर देते न बना। वह अदृश्य हो गईं और मन ही मन पश्चाताप करने लगीं कि उन्होंने व्यर्थ ही राम पर संदेह किया। राम सचमुच आदि पुरुष के अवतार हैं। अंत में भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें कथा में सम्मिलत होने वाले भक्तों के अलावा अन्य लोगों ने भी प्रसाद ग्रहण किया।