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कठुआ के भरमौरा में नहर किनारे सज गईं देहरियां

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कठुआ। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को कठुआ में छठ पर्व धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इसके लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। भरमौरा में नहर किनारे देहरियों को सजाने का काम पूरा कर लिया गया है। जहां सामूहिक रूप से हजारों की तादाद में लोग छठी मैय्या की पूजा करेंगे। छठ पर्व नहाय-खाए के साथ 28 अक्टूबर को शुरू होने जा रहा है। इस व्रत में लोग उदीयमान सूर्य और अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देते हैं। साथ ही छठी मैय्या की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन छठी मैय्या की विधि-विधान पूर्वक पूजा करने से भक्तों के सभी दुख-दर्द और कष्ट दूर होते हैं और मान-सम्मान और धन-वैभव में वृद्धि होती है।
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मुख्य रूप से छठ पर्व बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में बहुत ही मनाया जाता है। पिछले कुछ दशक में कठुआ से सटे औद्योगिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर इन इलाकों से लोग काम के सिलसिले में आए हैं और अब अपनी परंपराओं को यहीं पूरा करते हैं। 30 अक्टूबर, रविवार को छठ पर्व के अंतर्गत अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा, वहीं 31 अक्टूबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ यह पर्व संपन्न हो जाएगा।
नहाय-खाए के साथ होती है पर्व की शुरुआत
छठ पर्व मनाने की तैयारियों में जुटे सुनील कुमार, राम बचन, देवी दत्त, सुधीर, शांति देवी, आरती, अर्चना झा ने बताया कि छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाए के साथ होती है, जो कि 28 अक्तूबर को है। इस दिन घर की सफाई की जाती है और व्रती चने की सब्जी, चावल, साग आदि खाते हैं। 27 और 28 अक्टूबर को बाजारों में व्रत के सामान की खरीदारी की जाएगी। बताया कि नहाय-खाय के दूसरे दिन खरना होता है। इस दिन व्रती पूरे दिन व्रत रखते हैं। शाम को महिलाएं गुड़ की खीर बनाती हैं और व्रती उसी खीर को खाते हैं। अगले दिन 36 घंटे का निर्जली व्रत रखते हैं।
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