फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दौले माता मंदिर और डुग्गन से रवाना हुई वार्षिक नुकनाली यात्रा

विज्ञापन
विज्ञापन
कठुआ। जिले के दूर दराज पहाड़ों पर बसी मां चंडी नुकनाली वाली के दर्शन के लिए भक्तों का जोश देखते ही बनता है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दौले माता मंदिर, ढाडू, छपाडू, बनी आदि इलाकों से भक्तों के जत्थे महामाई के दर्शनों के लिए रविवार सुबह रवाना हुए। सुबह दौले माता मंदिर से नुकनाली के लिए वार्षिक यात्रा रवाना हुई तो आसपास के पहाड़ भी जयकारों से गूंज उठे। विभिन्न इलाकों से पैदल चलकर चंडी माता के भक्त नुकनाली मंदिर में मंगलवार को पहुंचेंगे। डुग्गन से भद्रवाह की ओर रिहाइशी इलाकों से दूर बर्फ से लकदक पहाड़ों की इस दुर्गम यात्रा कई सदियों से जारी है। ढाडू से भी भक्तों का जत्था महामाई के जयघोष करते और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर तान पर रवाना हुआ। ढोल की थाप के बीच झूमते भक्तों ने बगलू में विश्राम के बाद अनहोर के जंगलों की ओर प्रस्थान किया। यहां भक्त रात बिताकर सुबह चोटी पर महामाई के मंदिर की ओर रवाना होंगे।
विज्ञापन

अनहोर के जंगलों में रात भर लगता है मेला
बनी और डुग्गन के विभिन्न इलाकों से हजारों श्रद्धालु एक साथ हर साल नुकनाली के लिए रवाना होते हैं। प्रशासन द्वारा इंतजाम के अभाव में स्थानीय लोग यात्रा मार्ग पर करीब आधा दर्जन जगहों पर लंगर लगाते हैं। बगलू, अनहोर, लंबी तलाई और नुकनाली में लंगर लगाया जाता है। श्रद्धालुओं का पहला पड़ाव अनहोर है, जहां स्थानीय लोगों के सहयोग से लंगर की व्यवस्था की जाती है। गर्मियों में खानाबदोशों के निवास स्थान अनहोर में इन दिनों कोई नहीं रहता। ऐसे में जहां महिलाओं और बच्चों के लिए स्थानीय लोगों के सहयोग से एक शेड बनाया गया है। वहीं, हजारों भक्त जंगल के घने पेड़ों की ओट में ही रात गुजारते हैं। भक्त रात को महामाई का गुणगान करते हैं और लंगर कमेटी द्वारा पर्दे पर दिखाई जाने वाली रामायण का भी आनंद लेते हैं। इसके बाद सुबह यह यात्रा नुकनाली के लिए रवाना होती है। नुकनाली में सभी यात्राओं का मिलन होता है और माता के दर्शन करने के बाद दोपहर बारह बजे से पहले सभी यात्राएं वापस रवाना हो जाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें