जिले के पहाड़ी इलाकों में 180 एमएम तक दर्ज की गई बारिश से फसलों, सड़कों, बिजली ढांचे की भारी तबाही हुई है। दरिया और नालों की बाढ़ में धान की 60 और मक्की की पांच हेक्टेयर में लगी फसल 70 फीसदी तक बर्बाद हो गई है। धान को ऐरवां, चक छिब्बा, सलालपुर और कोट पुन्नू तो वहीं मक्की को लोआंग, संदरूण और दौल्का पंचायत में सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। मानसून की पहली बारिश ने जिले में इंतजामों के पोल भी खोली है।
मंगलवार को जिले के दूरदराज इलाकों में सड़क संपर्क दोपहर बाद तक ठप रहे। बनी सब डिवीजन का संपर्क रविवार शाम से ही जिला मुख्यालय से कट चुका था, जो मंगलवार दोपहर बाद बहाल हो सका है। शीतलनगर से बनी के बीच चार जगह बड़ी पस्सियां खिसकर सड़क पर आ गईं, तो वहीं निमार्णाधीन सड़क का मलबा खिसकने से यातायात बहाल नहीं हो पा रहा था।
मंगलवार सुबह छह बजे से ही ग्रेफ की मशीनरी को युद्धस्तर पर यातायात बहाल करने के लिए लगा दिया गया था। एसडीएम बनी जोगिंद्र सिंह जसरोटिया ने बताया कि फिलहाल हल्के वाहनों को आवाजाही की अनुमति दी गई है। उधर, कच्चा मकान गिरने से बेघर हुए चंदू राम के परिवार को प्रशासन ने रेड क्रॉस के माध्यम से दस हजार की नकद सहायता राशि, टेंट, बर्तन और राशि आदि की व्यवस्था कर दी है। दूर दराज इलाकों में हुए नुकसान का आकलन जारी है।
बिजली ढांचे को पहुंचे नुकसान के बाद मंगलवार को भी विभागीय टीमें बिजली बहाली के कार्यों में जुटी रहीं। कई जगह कंडक्टर टूट चुका था, तो वहीं बिजली के खंभे टूट गए थे जिन्हें बदलने के लिए कार्य जारी है। बिजली विभाग के कार्यकारी अभियंता मोहम्मद शफी ने बताया कि अधिकांश इलाकों में बिजली बहाली कर दी गई है। जिन इलाकों में ट्रांसफार्मरों को नुकसान पहुंचा है और खंभे ज्यादा टूटे हैं, वहां अगले कुछ घंटों में बिजली बहाल कर दी जाएगी।
उधर मुख्य कृषि अधिकारी विजय कुमार ने कहा कि बाढ़ में धान और मक्की की फसल 70 फीसदी तक बर्बाद हो गई है।