सेक्टर-52 के जंगलों में भीषण आग
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मढ़ीन तहसील के गांव छन्न चराखड़ी में मंगलवार की दोपहर को शार्ट सर्किट से पंद्रह कनाल गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। लोगों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन हीरानगर से जब तक फायर टेंडर पहुंता, आग ने पंद्रह कनाल फसल को तबाह कर दिया। बाद में दमकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया।
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार दोपहर करीब डेढ़ बजे शार्ट सर्किट से जीतो देवी के खेतों में आग ने तांडव मचाया। देखते ही देखते अन्य तीन लोगों की फसल को आगे ने अपने कब्जे में ले लिया और खेत में पक चुकी गेहूं की फसल को राख कर दिया। जीतो देवी निवासी होड़ कैंप की छह कनाल भूमि पर लगी गेहूं की फसल आग से राख हो गई।
वहीं विजय सिंह निवासी चक बाथल की चार कनाल, कमलेश देवी निवासी चक बाथल की तीन कनाल और बोध राज निवासी पथवाल की दो कनाल भूमि पर लगी गेहूं की फसल आग ने तबाह कर दी। बोधराज ने बताया कि सभी के खेत एक-दूसरे के साथ लगते हैं। ऐसे में जीतो देवी के खेत से चली आग ने पास लगी गेहूं की फसल को भी अपनी चपेट में ले लिया। करीब आधे घंटे बाद पहुंची दमकल विभाग की टीम ने आग पर काबू पाया।
पांच दिन में राख हो गई 123 कनाल पर फसल ः कठुआ। गर्मी का मौसम आते ही आग की घटनाओं में इजाफा हो गया। हर दिन कहीं न कहीं से आग की घटना सामने आ रही है, लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि इन घटनाओं को रोक पाने में दमकल विभाग असफल साबित हो रहा है। अब तक की पांच घटनाओं में ही 123 कनाल भूमि पर लगी गेहूं की फसल राख हो चुकी है। इससे उन्नीस किसानों की मेहनत उनकी आंखों के सामने बर्बाद हो गई।
पांच घटनाओं में सबसे अधिक नुकसान मढ़ीन तहसील के किसानों को हुआ है। वहां पर तीन घटनाओं में ही 86 कनाल भूमि पर लगी फसल राख हो गई और सोलह किसानों को नुकसान हुआ है। जिले में सबसे बड़ा मामला गदयाल सेक्टर में सामने आया है। जहां 21 अप्रैल को ग्यारह किसानों की 55 कनाल भूमि पर लगी फसल राख हो गई।
वहीं सत्रह अप्रैल को सोलह कनाल और पचीस अप्रैल को पंद्रह कनाल भूमि पर लगी गेहूं की फसल राख हो गई। इसके साथ ही शहर के पास जराई इलाके में दूसरी सबसे बड़ी आग की घटना सामने आई। जराई में चौबीस अप्रैल को तीस कनाल भूमि पर लगी गेहूं की फसल राख हो गई। 22 अप्रैल को चक गधाधर में छह कनाल भूमि पर लगी फसल राख हो गई थी।