जिले में गेहूं की सरकारी खरीद डिलीवरी की समस्या में फंसकर रह गई है। इसका खामियाजा केंद्रों पर पहुंच रहे किसानों को भुगतना पड़ रहा है। दर्जनों किसानों को एक सप्ताह से ज्यादा समय तक गेहूं की तुलाई के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। वर्तमान में डेढ़ लाख में से करीब 50 हजार क्विंटल गेहूं की डिलीवरी गोदामों में हो सकी है।
जिले में 71 पीसीएफ केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य योजनांतर्गत गेहूं की खरीद की जा रही है। इसके तहत अब तक एक लाख बावन हजार क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है। इसमें से करीब 50 क्विटल गेहूं की डिलीवरी मुख्यालय स्थित गोदामों में हो सकी है। इसकी मुख्य वजह डिलीवरी का ठेका नहीं हो पाना है। आसपास के क्रय केंद्रों से सचिव अपने स्तर से गेहूं की ढुलाई कराकर गोदामों तक पहुंचा रहे हैं, जिससे उनके केंद्रों पर खरीद नियमित चल रही है। लेकिन, बार, सौरई, चुनगी धनगौल, गुढ़ा, सौजना, भौड़ी से गेहूं की डिलीवरी संभव नहीं हो पा रही है। जिसका विपरीत असर गेहूं की खरीद पर पड़ रहा है। इन केंद्रों में अधिकांश किसानों को मायूसी हाथ लग रही है। कई केंद्र तो ऐसे हैं जिन पर किसानों को नंबर लगाने के बाद एक सप्ताह से ज्यादा समय तक अपनी बारी आने का इंतजार करना पड़ रहा है। जिससे किसानों में आक्रोश पनप रहा है।
दूरदराज केंद्रों पर बनी समस्या
दूरदराज के केंद्रों से गेहूं की डिलीवरी समय से नहीं हो पा रही है। इससे ऐसे केंद्रों पर गेहूं की कम खरीद हो रही है। इस समस्या का समाधान ढूंढा जा रहा है।
अनूप कुमार द्विवेदी, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक
सहकारिता
मंडी में बेचने को मजबूर किसान
तमाम किसान क्रय केंद्रों पर खरीद में आ रही समस्या को देख मंडी की ओर रुख करने लगे हैं। कई किसानों का कहना है कि मंडी में भले ही गेहूं का रेट कम मिल रहा हो लेकिन कम से कम तुलाई के लिए तो इंतजार नहीं करना पड़ रहा है।
यह है व्यवस्था
क्रय किए गेहूं की डिलीवरी का संपूर्ण दायित्व क्रय एजेंसी का है। क्रय एजेंसी ठेकेदार के माध्यम से गेहूं की ढुलाई कराएगी। सहकारी समितियों द्वारा क्रय किए गए गेहूं के परिवहन आदि मद में कोई व्यय भार वहन नहीं किया जाएगा। समय से ढुलाई और डिलीवरी नहीं हो पाने के फलस्वरूप होने वाली क्षति के लिए क्रय एजेंसी जिम्मेदार होगी। क्रय एजेंसी द्वारा अपना एक प्रतिनिधि डिलीवरी स्थल पर तैनात किया जाएगा।