हीरागनर। जम्मू-पठानकोट हाईवे पर छन्न आरोड़ियां में मंगलवार की सुबह बस और कार में हुई भीषण टक्कर में एक व्यक्ति की मौत हो गई। जबकि उसकी पत्नी, बहन और दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया।
जानकारी के अनुसार आल्टो कार (पीबी06एच-1796) कठुआ से जम्मू की ओर जा रही थी। हाईवे पर सफेद पट्टी लगाने का काम चल रहा था। इसलिए ट्रैफिक को दूसरी लाइन पर डाइवर्ट किया गया था। कार चालक ने डायवर्जन का साइन देख जैसे ही रूट चेंज किया कि सामने से तेज रफ्तार से आ रही बस (जेके21ए-0555) के साथ उसकी जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार पलटी खा कर डिवाइडर के दूसरी तरफ जा गिरी और उसके परखच्चे उड़ गए। घटनास्थल पर चीख पुकार मच गई। स्थानीय लोग तुरंत सहायता के लिए पहुंचे। कार में सवार सभी लोगों को बाहर निकाला गया। पुलिस की सहायता से सभी को अस्पताल पहुंचाया गया। यहां कार चालक संदीप सिंह को मृत घोषित कर दिया गया। जबकि मृतक की पत्नी रेखा सलाथिया, बेटे अभय सिंह समर सिंह के अलावा बहन मधु शर्मा निवासी छन्नी हिम्मत जम्मू का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर कर्रवाई शुरू कर दी है।
-------------------------
उपचार के दौरान रेखा पूछती रही पति का हाल
बेटे ने भी कहा- पापा उनके साथ इलाज क्यों नहीं करवा रहे
अमर उजाला ब्यूरो
कठुआ। हादसे में पति की मौत से पत्नी रेखा बेखबर थी। उनके बेटों को भी यह पता नहीं था कि उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। बेटे जिला अस्पताल में बार-बार डाक्टरों ने पूछते रहे कि पापा कहां हैं? पत्नी भी अपने पति का कुलश क्षेम डाक्टरों से पूछती रही।
करीब आधे घंटे तक चले उपचार के दौरान रेखा ने बार-बार कहा कि उनका क्या हाल है? वह कहां हैं। मुझे उनसे मिलना है। वह बार-बार स्ट्रेचर से उठने का प्रयास कर रही थी। वहीं बेटा समर भी एक ही रट लगाए था कि पापा कहां हैं? वह उनके साथ इलाज क्यों नहीं करवा रहे हैं। दूसरे बेटे को भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसके पिता उनका साथ छोड़ गए हैं। रेखा और उनके बच्चों को लोग दिलासा दे रहे थे कि वह ठीक हैं। वहीं मृतक की बहन को तो खुद ही होश नहीं थी। प्राथमिक उपचार के बाद बहन और पत्नी को जीएमसी जम्मू रेफर कर दिया गया।
ननिहाल छुट्टियां बिताने जा रहे थे बच्चे
समर ने बताया कि वह अपनी बुआ के साथ ननिहाल छन्नी हिम्मत जम्मू छुट्टियां बिताने के लिए जा रहे थे। सुबह जब पापा ने बुआ को जम्मू में ट्रेनिंग के लिए छोड़ने जाना था तो उन्होंने ननिहाल जाने के लिए कहा। उसके बाद पत्नी रेखा और दो बेटे समर और अभय पिता संदीप के साथ जाने को तैयार हो गए। उन्हें क्या पता था कि परिवार पर काल अपनी दृष्टि गड़ाए बैठा है।