कठुआ। जम्मू संभाग में अब तक के सबसे बड़े गबन का मामला प्रकाश में आया है। ‘फिर हेराफेरी’ फिल्म की तरह एक फर्जी बैंक खोल कर आम लोगों की मेहनत की कमाई को उसमें जमा किया गया। अब गरीब लोग रोजाना तथाकथित बैंक से अपनी जमा पूंजी निकालने के लिए चक्कर काट रहे हैं। सरकार की जनधन योजना से गरीबों के उत्थान से अलग जिला कठुआ, सांबा, उधमपुर, जम्मू, रियासी के ग्रामीण इलाकों में इस फर्जी बैंक की लगभग 40 शाखाएं खोली गई हैं, जिसमें लोगों के करोड़ों रुपये जमा करवाने का अनुमान जताया जा रहा है। फर्जी बैंक के झांसे में आए अधिकतर लोग मजदूर, छोटे व्यवसायी या किसान हैं।
लोगों ने इस फर्जी बैंक को कोआपरेटिव समझ कर मुश्किल से बचाए पैसों को इसमें जमा करवाया। इस तरह इस बैंक में गरीबों के करोड़ों रुपये जमा हो गए। अब तीन माह हो चुके हैं, लेकिन न तो लोगों को अपनी जमापूंजी वापस मिल रही है और न इंसाफ। मामला लोगेट गांव से प्रकाश में आया है। जहां द रूरल डेवलपमेंट मल्टीपर्पज को-आपरेटिव लिमिटेड (आरडीएमसीएल) के नाम से स्माल स्केल बैंकिंग का धंधा चल रहा था। अकेले लोगेट ब्रांच में ही 1200 खाते खोले गए। इस शाखा में कई लोगों ने 50- 50 हजार रुपये के फिक्सड डिपॉजिट करवाए हैं। लोगों के कितने पैसे डूबे हैं, इस बारे में कुछ ठोस कहना फिलहाल मुश्किल है, लेकिन लोगों के अनुमान के अनुसार यह राशि करोड़ों में हो सकती है।
जिला कठुआ में इस फर्जी बैंक की शाखाएं कठुआ, बुद्धि, कुमरी, लोगेट, दियालाचक, सांझीमोड़ सहित बिलावर और महानपुर के इलाकों में भी खोली गईं। अब जब लोगों को यह पता चला कि उनके पास धोखा हुआ है तो वे रोजाना अपनी जमा पूंजी निकालने के लिए तथाकथित बैंक के चक्कर लगा रहे हैं। यहां तक कि इस फर्जी बैंक में काम करने वाले लोगों की भी पूंजी जमा करवाई गई है। वे भी अब परेशान हो रहे हैं।
नौकरी के नाम पर भी दिया झांसा
प्रबंधकों ने लोगों को टारगेट पूरा करने पर अपने बैंक में पक्की नौकरी देने का वादा किया। उन्हें चार-पांच लाख रुपये या इससे ज्यादा की राशि बैंक में जमा करवाने का टारगेट दिया गया, जिसे पूरा करवाने पर उनकी पक्की नौकरी का प्रलोभन दिया गया। ऐसे में लोगों ने अपने दोस्तों, रिश्तेदारों यहां तक कि परिवार वालों के पैसे भी इस फर्जी बैंक में जमा करवाए। चपरासी से लेकर प्रबंधक तक को वेतन देने के लिए टारगेट पूरा करने पड़ते।
डिप्टी रजिस्ट्रार को-आपरेटिव नरेश कुमार ने बताया कि कोआपरेटिव के तहत जेसीसी, कोआपरेटिव आदि बैंक चल रहे हैं, जिन्हें रिजर्ब बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से लाइसेंस हासिल है। किसी भी बैंक को चलाने के लिए आरबीआई का लाइसेंस होना अनिवार्य है। कठुआ में कथित रूप से चलने वाले इस बैंक की शिकायत के बाद इसे बंद करवाया गया था और बाकायदा नोटिस चस्पा कर लोगों को इस बैंक में पैसे का लेन-देन न करने की हिदायत भी दी गई थी। फिर शिकायत मिली कि ब्रांच दोबारा खोल दी गई है। उन्होंने बताया कि दरअसल यह सोसाइटी मढ़ में पंजीकृत थी और इसका एरिया ऑफ आपरेशन यानी काम करने का क्षेत्र कठुआ नहीं है। फिर भी नियमों को ताक पर रख कर जिले में कई शाखाएं खोली गईं, जिसे बंद करवाया गया था। जानकारी मिली थी कि यह गैर कानूनी बैंक चलाने वाले लोगों की राशि का गबन कर रहे हैं। इस संबंध में क्राइम ब्रांच को भी मामला भेजा जा चुका है।
---बयान---
क्राइम ब्रांच इस मामले की छानबीन कर रही है। लोगों का जो पैसा गया है, उस मामले को लेकर जांच जारी है।
-रमेश कुमार झाला, एसएसपी क्राइम ब्रांच, जम्मू
एक लाख जमा करवा कर पौत्र को ब्रांच में लगवाया
रमेश दास ने बताया कि अपने पौत्र को उन्होंने नौकरी के झांसे में एक लाख जमा करवा कर आरडीएमसीएल में लगवाया, लेकिन फिर मांग बढ़ती चली गई। धीरे-धीरे उन्होंने अपने रिश्तेदारों तक की पूंजी इस ब्रांच में जमा करवाई। फिर भी कई माह का वेतन रोक दिया गया। बाद में ब्रांच के अधिकारियों ने कह दिया कि आपकी जमा राशि से हिस्सा काटा गया है, चूंकि आपने नौकरी का बांड भरा था। रमेश दास ने कहा कि यह सीधी लूट है, जिसमें कई गरीब परिवारों को लूटा गया है। इस सबंध में पुलिस में और जिला प्रशासन के ‘प्रयास’ कार्यक्रम में भी शिकायत दर्ज करवाई गई है।
जमापूंजी वापस करने में करते हैं आनाकानी
पृथिपाल ने बताया कि उनकी पत्नी ने भी इस फर्जी ब्रांच में लगभग पचास हजार रुपये जमा करवाया था, लेकिन अब जब राशि निकालने जाते हैं, तो टीडीएस कटवाने को बोलते हैं। हर बार आनाकानी की जाती है। कई लोगों की तो पासबुक भी गुम कर दी जाती है।
लगभग 80 वर्षीय सरनदास ने बताया कि उसने मजदूरी करते हुए कुछ पैसे अपने बुढ़ापे के लिए जमा किए थे। उन्होंने तथाकथित को-आपरेटिव बैंक में खोले गए अपने खाते में करीब 25 हजार रुपये जमा करवाए थे। अब जब उनको पैसे की सख्त जरूरत पड़ी है, तो बैंक के अधिकारी उनकी जमापूंजी नहीं लौटा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक गरीब आदमी इसी आस में रुपये जोड़ता है कि बुढ़ापे के समय वह उनके काम आएगा। अब उनकी सेहत भी ठीक नहीं रहती है। इस उम्र में इतनी बड़ी जालसाजी का शिकार हो जाने से उनकी जिंदगी बड़ी मुश्किल में गुजर रही है।
गौरव गुप्ता ने बताया कि उन्हें ब्रांच में पक्की नौकरी का झांसा दिया गया। तथाकथित बैंक की तरफ से उनको टारगेट दिया गया, जिन्हें पूरा करने के लिए उसने कई जान-पहचान वालों के इस बैंक में खाते खुलवाए। कई महीने का वेतन नहीं मिला, तो नौकरी छोड़ना चाही, लेकिन उन्हें उल्टा प्रबंधन ने कह दिया कि बांड साइन हुआ है, ऐसे में नौकरी छोड़ने पर पहले बांड की राशि जमा करवाई जाए। इस फर्जी बैंक ने बड़ी संख्या में बेरोजगार युवाओं को अपना शिकार बनाया है।
किसान गणेश कुमार ने बताया कि उनका भी सात हजार रुपये आरडीएमसीएल में जमा है। जब उन्होंने बैंक में से अपनी जमा पूंजी निकालनी चाही तो उन्हें धमकाया गया। उन्होंने बताया कि न सिर्फ सहार लोगेट बल्कि कुमरी, कठेरा, बुद्धि आदि निकटवर्ती गांवों के सैकड़ों लोगों इसी बैंक में अपनी मेहनत की कमाई को जमा करवाया है।