नगरी। पशु तस्करों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब वे रोकने वालों पर पथराव कर उन्हें मारने पर उतारू हो चुके हैं। ताजा मामला नगरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत पड़ते माही चक के किसान नगर का है, जहां वीरवार सुबह कुछ अज्ञात लोग पैदल पशु तस्करी को अंजाम दे रहे थे और जब स्थानीय लोगों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो पशु तस्करों ने ग्रामीणों पर पथराव शुरू कर दिया। तस्करों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने रोकने वाले लोगों को मारने का भी प्रयास किया, जिसमें उन्होंने एक गाड़ी में भी तोड़फोड़ की। वहीं इस पथराव के दौरान दो युवा जख्मी भी हो गए, जिनकी पहचान पंकज कुमार पुत्र राम दास व रोहित शर्मा पुत्र किशोरी लाल निवासी किसान नगर माहीचक के रूप में हुई। वहीं जब ग्रामीणों ने नगरी पुलिस को मामले की जानकारी दी तो पुलिस टीम ने काफी देर बाद पहुंच कर पशु तस्करों से छुड़वाए गए मवेशियों को मुक्त करवाया। इसके बाद नगरी पुलिस ने उक्त मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। मालूम रहे कि नगरी क्षेत्र में लगातार पशु तस्करी के मामले सामने आ रहें हैं, जिसमें पशु तस्कर पैदल ही खेतों व गांवों के बीच से पशु तस्करी के प्रयास कर रहे हैं। बड़ाला क्षेत्र में युवाओं ने कई बार मवेशियों को छुड़वाया। कुछ ही दिन पूर्व नगरी के गूंद क्षेत्र में भी पशु तस्करी का प्रयास विफल किया गया था, जिसमें पुलिस ने नगरी से ही एक व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया था। जब इस संदर्भ में कठुआ थाना प्रभारी अजय सिंह चिब से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद एफआईआर दर्ज की गई है और पुलिस आरोपियों की जांच में जुट गई है।
स्थानीय लोगों ने की सख्त कानून बनाने की मांग
जिले में लगातार बढ़ रहे पशु तस्करी के मामलों पर लगाम लगाने की मांग करते हुए स्थानीय लोगों ने केंद्र सरकार से गोवंश की तस्करी पर सख्त कानून बनाने की मांग की ताकि जो लोग इस कृत्य को अंजाम दे रहे हैं, उन्हें सख्त सजा दी जाए। ग्रामीणों ने बताया कि आए दिन जिले में ऐसे मामले देखने को मिल रहे हैं और इन मामलों को अलग-अलग जगहों से अंजाम दिया जा रहा है लेकिन पुलिस प्रशासन कुछ नहीं कर रहा। लोगाें ने बताया कि कुछ दिन पहले कठुआ के युवाओं ने देर रात गाड़ियों का पीछा कर कुछ मवेशियों की जान बचाई लेकिन न जाने क्या कारण हैं कि जो गाड़ियां अलग- अलग रास्तों से राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाती हैं, उन पर स्थानीय पुलिस नाकों पर तैनात पुलिसकर्मियों की नजर क्यों नहीं पड़ती।