कठुआ। विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट ने लापरवाही से वाहन चालने के कारण हुई महिला की मौत मामले में आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी किया है। नौ साल पुराने इस मामले में ऑटो चालक को राहत मिली है।
पुलिस के ओर से कोर्ट में दायर रिपोर्ट के अनुसार कठुआ के वार्ड नंबर सात निवासी आरोपी राकेश कुमार पर आरोप है कि 20 अगस्त 2016 को उसने अपने ऑटो को लापरवाही और तेज गति से चलाया। इस कारण आरोपी ने सावन चक के पास अपने वाहन पर नियंत्रण खो दिया। इस ऑटो की चपेट में आकर स्थानीय महिला जसवंत कौर घायल हो गईं थीं।
जिला अस्पताल में कुछ दिन उपचार के बाद घायल जसवंत को बेहतर इलाज के लिए जीएमसी जम्मू भेजा गया। वहां इलाज के दौरान जसवंत ने 24 अगस्त को दम तोड़ दिया। इसलिए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरपीसी के तहत मामला दर्ज कर अदालत में आरोप पत्र दायर किए। आरोपी ने कोर्ट में खुद को दोषी न मानकर मुकदमा चलाने का दावा किया।
इसके बाद अभियोजन पक्ष को सबूत पेश करने का निर्देश दिया गया। अभियोजन पक्ष ने आरोपी के अपराध को साबित करने के लिए 11 गवाहों की सूची में से पांच गवाहों को अदालत में पेश किया।
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि उसके मुवक्किल को झूठे और तुच्छ मामले में फंसाया गया है। आरोपपत्र में गंभीर विसंगतियां हैं। आरोपी को अपराध से जोड़ने के लिए पत्रावली में साक्ष्य भी नहीं है। आरोपी सम्मानजनक बरी होने का हकदार है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि मामले में कई प्रमुख गवाह या तो मुकर गए या उन्होंने अभियोजन पक्ष की कहानी का समर्थन नहीं किया। हालांकि जसवंत के बेटे हरप्रीत सिंह ने प्रत्यक्षदर्शी होने का दावा किया है और कहा कि ऑटो ने उनकी मां को तेज गति से टक्कर मारी और आरोपी ही घटना का कारण बना ऑटो चला रहा था। आरोप की पुष्टि के लिए पत्रावली में कोई विशेषज्ञ राय या यांत्रिक निरीक्षण रिपोर्ट नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में महत्वपूर्ण गवाह होने के बावजूद अभियोजन पक्ष ने जांच अधिकारी और पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर से पूछताछ नहीं की। उनकी अनुपस्थिति एक गंभीर चूक है जो अदालत को अभियोजन पक्ष की कहानी की पुष्टि से वंचित करती है। इसलिए कोर्ट ने आरोपी को बाइज्जत बरी करने का फैसला सुनाया। कोर्ट ने आरोपी की जमानत और व्यक्तिगत बाॅन्ड को भी निरस्त कर दिया।