कठुआ। उप न्यायाधीश अमनदीप कौर ने विवाहिता को प्रताड़ित कर उसे चोट पहुंचाने के दो आरोपियों को बरी कर दिया। आदेश के अनुसार, अभियोजन पक्ष आरोपियों के अपराध को साबित करने में विफल रहा। चालानी रिपोर्ट के अनुसार दोनों आरोपियों के दोषसिद्ध होने की कोई संभावना नहीं है। लिहाजा दोनों आरोपियों के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से बरी कर उनके व्यक्तिगत और जमानत बांड को भी निरस्त कर दिया गया।
कोर्ट में दायर रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में शिकायतकर्ता और पीड़िता ने दो आरोपियों पर प्रताड़ित कर उसे चोट पहुंचाने का आरोप लगाया था। इसके बाद कठुआ पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 498-ए, 323, 406, 34 के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की थी।
दो फरवरी 2023 को दोनों आरोपियों के खिलाफ इन अपराधों के लिए आरोप तय किए गए थे। इसके बाद दोनों आरोपियों ने कोर्ट में दोषी होने की दलील नहीं दी और मुकदमा चलाने का दावा किया गया।
इसके बाद कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाहों की सूची पेश की गई। सुनवाई के दिन मामले में पीड़िता और एक अन्य की गवाही ली गई। इसमें दोनों गवाहों ने बताया कि घटना के दिन शिकायतकर्ता और एक आरोपी के बीच तीखी बहस हुई थी।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायालय ने माना कि गवाहों के बयान से ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है कि पीड़िता के साथ आरोपियों ने कोई क्रूरता की है। इसलिए कोर्ट में शेष गवाहों की गवाही करवाना निरर्थक कार्य होगा। इससे अदालत का कीमती समय भी बर्बाद होगा। इसके बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बाइज्जत बरी करने का आदेश सुनाया है।