- साल 2016 में लाहन के कारोबार के आरोप में महिला पर दर्ज हुआ था मामला
कठुआ। विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट ने नौ साल पुराने आबकारी अधिनियम मामले में आरोपी महिला को बरी कर दिया है। इसके अलावा आरोपी के व्यक्तिगत और जमानत बांड को भी खारिज कर दिया है।
आदेश के अनुसार मामले की जांच ऐसे अधिकारी ने की थी, जो आबकारी अधिनियम के तहत जांच करने में सक्षम नहीं था। लिहाजा आरोपी की सजा की कोई संभावना नहीं है और मामले में दायर चालान को केवल इसी आधार पर खारिज किया जाता है। इसके अलावा कोर्ट ने आदेश दिया कि आरोपी के आबकारी अधिनियम की धारा 48 (ए) के तहत अपराध से बरी किया जाता है।
पुलिस की ओर से दायर रिपोर्ट के अनुसार आरोपी नीमा देवी निवासी चक द्राब खान को कठुआ पुलिस ने अवैध शराब के कारोबार के आरोप में साल 2016 में गिरफ्तार किया था। इसके बाद आरोपी के खिलाफ न्यायालय में 18 मई 2016 को आरोप तय किए गए थे। इसके बाद कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल पांच गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि मामले में जांच सहायक उपनिरीक्षक दलीप सिंह द्वारा की गई थी, जो आबकारी अधिनियम के प्रावधानों के तहत ऐसा करने के लिए सक्षम नहीं थे। आरोपी के वकील ने कहा कि कानून के मुताबिक मामले की जांच सिर्फ उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी या उसके ऊपर के अधिकारी कर सकते हैं। लिहाजा आरोपी को बरी करने की अपील की गई। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को बरी करने का निर्देश दिया। संवाद