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'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान का जिले में कमाल

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कठुआ। जिले में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। समाज सुधार के लिए चलाए गए अभियानों का ही नतीजा है कि गत पांच साल में लिंगानुपात में 52 प्वाइंट का अंतर आया है। 2014-15 में अभियान की शुरुआत के समय जहां जिले में लिंगानुपात 862 था, वहीं 2018-19 में यह बढ़कर 914 हो गया है। हेल्थ मैनेजमेंट इंफोर्मेशन सिस्टम के ताजा आंकड़ों से यह खुलासा हुआ है।
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जिले में तेजी से बढ़ते लिंगानुपात के चलते केंद्र सरकार ने कठुआ को देश के ऐसे सौ जिले में शामिल किया था जहां पॉयलेट मोड पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ मुहिम को शुरू किया गया है। हालांकि, इस दौरान भी उतार चढ़ाव सामने आए और अब भी जिले के सामने बेटियों का लिंगानुपात घटाने के लिए कई चुनौतियां हैं लेकिन बावजूद इसके बीते दो वित्तीय वर्षों के दौरान हुई मेहनत रंग लाई है।
तेजी से बढ़ा पहली तिमाही की गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना में स्वास्थ्य विभाग की आशा और हेल्थ वर्करों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण पर जोर दिया गया। पिछले तीन साल में पंजीकरण में तेजी से बढ़त दर्ज की गई है, जिसके फलस्वरूप अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के पास गर्भवती महिलाओं की सूची उपलब्ध रहती है और ऐसे में गर्भपात करवाने वालों पर नजर रखी जाती है।
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एचएमआईएस से प्राप्त आंकड़े
वर्ष लिंगानुपात
2014-15 862
2015-16 873
2016-17 852
2017-18 885
2018-19 914
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कर चुका है सम्मानित
जिले में बेटी बचाओ बेेटी पढ़ाओ अभियान की सफलता के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय 2017 की शुरुआत में तत्कालीन उपायुक्त रमेश कुमार को अनुकरणीय प्रदर्शन के लिए सम्मानित कर चुका है। प्रभावी रूप से समुदायों को इस अभियान से जोड़ने के लिए मंत्रालय ने जिला कठुआ की प्रशंसा की और इसके साथ ही देश के उन दस जिलों में शामिल किया जिन्होंने महत्वपूर्ण और प्रभावी योगदान से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से बदलाव लाने की दिशा में काम किया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने मन की बात कार्यक्रम में कठुआ जिले में चले इस अभूतपूर्व और बदलाव के अभियान की जमकर प्रशंसा की।
अपनी ही तरह के अनूठे अभियान पहल-एक कदम नारी सम्मान की ओर चार वर्ष पूर्व जिला कठुआ में शुरू किया गया था जिसके एक साल के भीतर ही पाजिटिव नतीजे सामने आना शुरू हो गए थे। बहुक्षेत्रीय इस अभियान के तहत जागरूकता के लिए मेगा जागरूकता कैंप, हस्ताक्षर अभियान, मास मीडिया अभियान, नुक्कड़ नाटकों, जागरूकता रैलियों के साथ साथ वाद विवाद प्रतियोगिताएं भी आयोजित करवाई गईं। लोगों को अभियान से जोड़ने के लिए विशेषतौर पर डोगरी और उर्दू भाषा का प्रयोग किया गया जो आम तौर पर बोली जाती है। एक ओर जहां बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान पर कॉलर टयून जारी की गई वहीं लड़कियों के लिए अनूठी पहल में प्रोत्साहन योजना भी चलाई गई जिसमें कॉरपोरेट जगत द्वारा निजी उच्च संस्थानों में गरीब बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए योगदान दिया गया।
लोग अपनी जिम्मेदारियां समझ रहे हैं। आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के साथ ही लोग जमीनी स्तर पर बेटियों को बचाने और पढ़ाने के लिए आगे आए हैं। जिले में अभियान को और तेजी दी जाएगी ताकि लिंगानुपात को इससे भी कम किया जा सके।
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-ओम प्रकाश भगत, डीसी, कठुआ
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