कठुआ। केंद्र सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण में कठुआ नगर परिषद को भले ही 84वां स्थान प्राप्त हुआ है, लेकिन शहर की सफाई व्यवस्था और विकास कार्यों से आम लोग संतुष्ट नहीं है। जगह-जगह कचरे और गंदगी के ढेर, टूटी नालियां, बदहाल गलियां परिषद की कार्यवाही की पोल खोल रही हैं। कुछ ऐसा ही हाल शहर के वार्ड 14 स्थित राम कॉलोनी का है, जहां नाली और गली में अब लगभग फर्क ही खत्म हो गया है।
स्थानीय निवासी श्याम लाल, मोहिंदर पाल, मीर चंद, बोध राज आदि का कहना है कि करीब 10 वर्ष पूर्व उनके वार्ड की कुछ गलियों का नगर परिषद द्वारा निर्माण किया गया था, लेकिन उसके बाद उसकी देखरेख नहीं हुई। नतीजा यह रहा के उस दौरान बनी हुई नालियां जगह-जगह बंद हो गई और गलियों में एक के बाद एक लगी टाइलों के टूटने का सिलसिला शुरू हो गया है। इसके चलते अगर मोहल्ले में कुछ स्थानों पर गलियां बनी भी हैं तो वहां से गुजरना अब आसान नहीं है। ऊपर से नाले नाले का गंदा पानी लोगों के घरों को क्षतिग्रस्त करने लगा है। पहले ही लोग कोरोना की महामारी से जूझ रहे हैं। अब मौसम में हुए बदलाव के साथ मच्छरों ने भी अपना प्रकोप बढ़ा दिया है। खासकर उनके मोहल्ले में जगह-जगह हुए जलभराव मच्छरों के आशियाने बन चुके हैं। ऐसे में अब यहां रहने वाले लोगों को डेंगू का भी डर सताने लगा है। इस संबंध में वह लोग कई बार कठुआ नगर परिषद के कार्यालय सहित स्थानीय पार्षद से भी गुहार लगा चुके हैं। लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन देकर ही टाल दिया जाता है। इसके कारण समस्या जस की तस बनी हुई है। मोहल्ला वासियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनकी समस्या को नगर परिषद संज्ञान में नहीं लेगा तो यहां रहने वाले सैकड़ों लोग प्रदर्शन करने को मजबूर हो जाएंगे। इस संबंध में स्थानीय पार्षद भूपिंदर राज का कहना है कि अभी उनकी प्राथमिकता वार्ड के वह मोहल्ले है जहां अब तक लोगों को गलियों और नालियों की सुविधा नहीं मिली है। फंडों की उपलब्धता के अनुसार इस मोहल्ले में भी विकास कार्य किए जाएंगे।