कठुआ। शहर के पटेल नगर में दो दिवसीय सत्संग का आगाज हो गया है। शनिवार को सत्संग के पहले दिन कथावाचक संत सुभाष शास्त्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को सुख की प्राप्ति के लिए अपनी इंद्रियों को वश में रखने का ज्ञान दिया।
उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्र हमें जीने की कला सिखाते हैं ताकि हम सुखपूर्वक जीवन जी सकें लेकिन इसके लिए हमें वह कर्म कदापि नहीं करना चाहिए, जिसे करने के बाद पछताना पड़े। कथावाचक ने कहा कि यदि हम अपनी इंद्रियों को वश में नहीं कर सकते हैं तो आपकी सारी शिक्षा, अनुभव व अन्य योग्यता व्यर्थ है। सभी ज्ञानेंद्रियां कामनाओं की प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि हमें इंद्रियों को दमित नहीं करना है अपितु नियंत्रित कर देश, काल और परिस्थिति की मर्यादा के अनुसार इनका सदुपयोग करना है क्योंकि काल रूपी सर्प हम सबके पीछे लगा हुआ है और हम इससे बचने के लिए भागे जा रहे हैं। नाना प्रकार से बचाव के उपाय कर रहे हैं। ऐसी जगह तलाश कर रहे हैं, जहां शरण लेकर इस काल रूपी सर्प से बचा जाए लेकिन हम भूल जाते हैं कि हम इस संसार के किसी भी कोने में चले जाएं तो भी हम इस काल रूपी सर्प से बच नहीं सकते हैं।
अतः बुद्धिमानी इसी में है कि तुम इस समय को नष्ट न कर ज्ञानेंद्रियों को नियंत्रण में रखते हुए इनका सदुपयोग कर दुष्कर्मों व कामनाओं से स्वयं को मुक्त रखें। जिस जीव की ज्ञानेंद्रियां उसके वश में हैं तो समझ लें कि उसका मन भी उसके वश में हैं। ऐसे व्यक्ति को संसार में कोई दुखी नहीं कर सकता है। अर्थात उसे परमानंद की प्राप्ति हो गई है।