कठुआ। शहर के वार्ड 12 में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन जारी है। इसमें बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। कथा के छठे दिन कथावाचक आचार्य लीला किशोरी ने उपस्थित भक्तों के समक्ष भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणि के विवाह का प्रसंग सुनाया। इस मौके पर श्रीकृष्ण और रुक्मणि के विवाह से जुडी झांकी भी प्रस्तुत की गई। इसके दर्शन पाकर वहां मौजूद संगत मंत्रमुग्ध रही।
बुधवार को जारी कथा के दौरान आचार्य लीला किशोरी ने बताया कि विदर्भ के राजा भीष्म के घर जन्मी रुक्मणि बाल अवस्था से ही भगवान श्रीकृष्ण को पति के रूप में चाहती थी लेकिन उसका भाई रुक्मणि का विवाह राजा शिशुपाल के साथ कराना चाहता था। रुक्मणि ने अपने भाई की इच्छा जानी तो उसे बड़ा दुख हुआ। अत: उन्होंने सुदेव नामक ब्राह्मण को सात श्लोकों में लिखा हुआ पत्र देकर कहा कि वह श्रीकृष्ण से विवाह करना चाहती हैं। यह संदेश वह श्रीकृष्ण तक पहुंचा दें। इसके साथ उन्होंने संदेश वाहक को उन्हें प्राप्त करने के लिए उपाय भी बताया। पत्र में रुक्मणि ने बताया कि वह प्रतिदिन पार्वती की पूजा करने के लिए मंदिर जाती हैं। श्रीकृष्ण आकर उन्हें यहां से ले जाएं। पत्र के माध्यम से रुक्मणि ने कहा कि मुझे विश्वास है कि आप इस दासी को स्वीकार नहीं करेंगे तो मैं हजारों जन्म लेती रहूंगी। मैं किसी और पुरुष से विवाह नहीं करना चाहती हूं। बेशक सौ जन्म लेने पड़ें। आचार्य लीला किशोरी ने बताया कि पार्वती के पूजन के लिए जब रुक्मणि आई, उसी समय प्रभु श्रीकृष्ण रुक्मणि का हरण कर ले गए। अत: रुक्मणि के पिता ने रीति रिवाज के साथ दोनों का विवाह कर दिया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण और रुक्मणि के विवाह की कथा हर विवाहित दंपती को सुननी चाहिए। इस कथा के प्रभाव से उनका दांपत्य जीवन सदा सुखमय बना रहेगा।