कठुआ। मां के सिद्धिदात्री स्वरूप की आराधना के साथ शक्ति के नौ स्वरूपों की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्र बुधवार को संपन्न हो गया। पर्व के अंतिम दिन जगह-जगह कंजक पूजन का आयोजन किया गया। भक्तों ने इनकी पूजा कर उनका आशीष प्राप्त किया। वहीं, जिले के देवी मंदिरों में हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। भक्तों ने कंजक का पूजन कर घरों में भी माता के स्वरूप के तौर पर बीजी गई पवित्र साखों का विसर्जन किया। इसके बाद नौ दिनों से जारी व्रत को पूरा किया गया।
बुधवार को जसरोटा स्थित काली माता के दरबार, नगरी स्थित माता बाला सुंदरी मंदिर और शहर के कृष्णा कॉलोनी स्थित श्री महाकालेश्वर शिवदुर्गा मंदिर में सुबह हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। यहां पूर्णाहुति के बाद माता के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। सबसे ज्यादा भक्त नगरी स्थित माता बाला सुंदरी के भवन और जसरोटा स्थित काली माता के दरबार में उमड़े। यहां दर्शन करने के लिए भक्तों को लंबी-लंबी कतारों में खड़े रहना पड़ा। जसरोटा मंदिर कमेटी के प्रधान जगदीश सिंह जसरोटिया के अनुसार नौवें दिन करीब 50 हजार भक्तों ने माता के दर्शन किए। इसके अलावा बाला सुंदरी बिलावर, शेर कोटला स्थित चंडिका माता मंदिर, काली माता मंदिर जांड़ी, चन्नग्रां स्थित बुआ दाती मंदिर, लखनपुर में काली माता मंदिर, जोड़ियां माता मंदिर सहित अन्य मंदिरों में दिन भर भक्तों का तांता लगा रहा।
उधर, घरों में नवरात्र का व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह से ही कंजक पूजन के लिए तैयारी में जुटे रहे। भक्तों ने हलवा, पूरी और चने का प्रसाद बनाकर कंजकों को अपने घरों में आमंत्रित कर उनका पूजन किया। शाम होने के बाद जलस्रोतों में पवित्र साख का विसर्जन करने वालों का मेला लगा रहा। शहर की प्राचीन बावलियों और शहर के मध्य बहने वाली नहर में बड़ी संख्या में भक्तों ने साख का विसर्जन किया।