बसोहली के सन्ननघाट में जारी श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन सुनती संगत।
कठुआ। बसोहली के सन्ननघाट में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। इसके पांचवें दिन कथावाचक गायत्री दीदी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाललीला और रासलीला का प्रसंग सुनाया। झांकी ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए कथावाचक ने बताया कि सात कोस लंबे, चौड़े कालिकाल के देवता गोवर्धननाथ को सात वर्ष के कन्हैया ने अपनी सबसे छोटी अंगुली पर रखा। ऐसा करके उन्होंने इंद्र देव का अभिमान तोड़ा।
उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के पैदा होने के बाद उसको मौत के घाट उतारने के लिए कंस ने अपनी राज्य की सर्वाधिक बलवान राक्षसी पूतना को भेजा।
पूतना वेश बदलकर भगवान श्रीकृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है लेकिन भगवान श्रीकृष्ण उसको मौत के घाट उतार देते हैं। उसके बाद कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन की तैयारी करते हैं।
भगवान कृष्ण उनको भगवान इंद्र की पूजा करने से मना करते हुए गोवर्धन महाराज की पूजन करने की बात कहते हैं। इस बात से इंद्र भगवान क्रोधित हो जाते हैं। वह अपने क्रोध से भारी वर्षा करते हैं। इससे ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं।
भारी वर्षा को देख भगवान श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर पूरे नगरवासियों को पर्वत को नीचे बुला लेते हैं। इसके बाद सभी ब्रजवासी भगवान श्री कृष्ण और गोवर्धन महाराज के जयकारे लगाने लगते हैं।