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Kathua News: बांस की टोकरी बना कारीगर कमा रहे 250 से 300 रुपये

Sat, 21 Jun 2025 12:49 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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बनी में बांस से बने उत्पाद बेचने पहुंचा कारीगर। संवाद - फोटो : kathua
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सात दिन की मेहनत से तैयार होती है टिकाऊ और पारंपरिक छाबा, कई परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी
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संवाद न्यूज एजेंसी
बनी। पहाड़ी कस्बे बनी की गोद में आज भी पारंपरिक हस्तशिल्प की गूंज है, जहां बांस से बनी विशाल टोकरियां, स्थानीय भाषा में छाबा, डलिया और सूप, आज भी ग्रामीण संस्कृति की धड़कन बनी हुई हैं। यह न केवल पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक कला का प्रतीक है, बल्कि स्थानीय परिवारों के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण स्रोत भी है।
ग्रामीणों की मेहनत से तैयार यह पारंपरिक टोकरी आज उस विरासत की कहानी कहती है, जो समय के साथ धूमिल हो रही है। ज़रूरत है तो बस उसे पहचान देने और बाजार तक पहुंचाने की। स्थानीय कारीगर साधुराम ने बताया कि एक बड़ी छाबा को पूरी तरह से हाथ से तैयार करने में 6 से 7 दिन लगते हैं। इसकी बाजार में कीमत लगभग 3,000 से 4,000 रुपये होती है।
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टोकरियों के निर्माण में बांस का प्रयोग होता है, जिसकी बारीक कटाई और छिलाई काफी मेहनत का कार्य है। प्रत्येक बांस की कीमत 250–300 रुपये होती है और एक टोकरी के लिए औसतन 6 से 8 बांस की जरूरत पड़ती है। ये बांस 10 से 15 फीट लंबे होते हैं और उच्च गुणवत्ता के होने चाहिए ताकि टोकरी सालों तक चले। छोटी टोकरियों का उपयोग ग्रामीण परिवार चपातियां रखने, सब्ज़ियां रखने या अनाज छानने के पारंपरिक सूप के रूप में करते हैं।
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