- महत्वपूर्ण परियोजना पर खर्च हो रहे हैं 13 करोड़
कठुआ। अगले बरसात के मौसम में बन-बसोहली के बीच सूखे नाला पर आवाजाही ठप नहीं होगी। मार्च तक ढलान स्थिरीकरण का काम पूरा हो जाएगा। परियोजना पर 13 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। अभी हालात ऐसे हैं कि बारिश के कारण मलबा नाले में आ जाता है जिस कारण यातायात पूरी तरह से ठप हो जाता है। वाहन चालकों को मलबा हटने तक घंटों इंतजार करना पड़ता है। अब अगले महीने काम पूरा होने के बाद उन्हें सुचारू यातायात की सुविधा मिलेगी।
सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की 69 आरसीसी की ओर से सूखे नाला की ढलान स्थिरीकरण का काम पूरा कर लिया जाएगा। पुल निर्माण में लगातार आ रही अड़चन को देखते हुए बीआरओ ने लगभग 13 करोड़ की लागत से सूखे नाले से सटे पहाड़ से होने वाले भूस्खलन को रोकने के लिए काम करवाया है। नाले में सीधा आने वाले मलबे को रोकने के लिए विशेष ट्रीटमेंट किया जा रहा है जिससे बनी-बसोहली के बीच सफर सुगम होगा।
शीतल नगर और बनी के बीच पड़ते नाले में लगातार मलबा आने के कारण बरसात में अक्सर लोगों को मुसीबतें झेलनी पड़ती थीं। कई घंटे तक बनी-बसोहली के बीच संपर्क कट जाता था। बीआरओ की ओर से कुछ साल पहले पुल निर्माण का काम शुरू किया गया लेकिन किन्हीं कारणों से काम आगे नहीं बढ़ पाया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पुल को लेकर नई योजना बनाई जा रही है, लेकिन उससे पहले यह कार्य बेहद जरूरी था।
शीतलन गर की ओर से जाते समय नाले से सटे पहाड़ से आने वाले मलबे को रोकने के लिए जाला बांधा गया है। उधर, नाले में भी अवरोधक लगाए जा रहे हैं। यह परियोजना न केवल सुविधाजनक आवागमन का रास्ता खोलेगी बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, व्यापार, पर्यटन और आपात सेवाओं के लिए भी बड़ा सहारा बनेगी। बनी-बसोहली और भद्रवाह के बीच जारी परियोजना से चिनाब घाटी का रास्ता भी सीधा जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे से जुड़ता है।
सूखे नाले में लगातार आने वाले मलबे और पास की पहाड़ी से भूस्खलन रोकने के लिए लगभग 13 करोड़ की परियोजना पर काम किया जा रहा है। ढलान स्थिरीकरण और नाला ट्रीटमेंट के काम से सड़क पर सफर करने वालों को काफी राहत मिलेगी। पूरा काम मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा।
- अविनाश वर्मा, कार्यकारी अभियंता, बीआरओ, 69 आरसीसी।