एवरेस्ट फतह कर अपने गांव पहुंचे बलकार सिंह
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बुलंद हौसलों के आगे पहाड़ भी नतमस्तक हो जाते हैं। बस आगे बढ़ने की हिम्मत के साथ चुनौतियों से लड़ने का जज्बा होना चाहिए। कुछ ऐसा ही जज्बा लेकर बलकार सिंह निकले तो दुनिया की सबसे दुर्गम और ऊंची चोटी एवरेस्ट को फतह कर लिया।
9 पंजाब रेजिमेंट में बतौर हवलदार तैनात बलकार सिंह 29 सदस्यीय उस पर्वतारोही दल के सदस्य थे, जिसने 27 मई को एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर न सिर्फ कठुआ जिले, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया।
सोमवार को अपने गांव हीरानगर के हरिपुर पाटिल में पहुंचे बलकार सिंह का गांव वासियों ने का जश्न के साथ स्वागत किया। जांबाज बेटे के पहुंचने की उम्मीद लगाए गांव के कई सदस्य स्वागत के लिए चढ़वाल स्थित नेशनल हाईवे पर भी पहुंच गए। चढ़वाल से शुरू हुआ जश्न का सिलसिला रैली के रूप में आगे बढ़ा तो हर किसी को बलकार के अदम्य साहस की चर्चा करते देखा गया।
अमर उजाला से बातचीत में बलकार सिंह ने बताया कि जज्बा हो तो हर चुनौती को पार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पर्वतारोही के सामने कई तरह की दिक्कतें थीं, लेकिन उनकी परवाह किए बिना दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढे़।
बलकार सिंह भारत की ओर से भेजे गए एवरेस्ट एक्सपेडिशन-2016 के 19 सदस्यीय पर्वतारोहण दल में शामिल थी। दल ने कर्नल गौरव कारकी के नेतृत्व में एवरेस्ट पर चढ़ाई की। हरिपुर पाटिल के सरपंच तिलक राज ने बताया कि गांव के साथ ही कठुआ जिले के लिए यह गौरव की बात है। यहां के बेटे ने एवरेस्ट पर चढ़कर युवाओं को प्रेरणा दी है।