संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। प्रख्यात तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन के निधन पर शहर के कलाकारों, संगीतकारों और साहित्यकारों ने गहरा शोक जताया है। मंगलवार को शहर के मुखर्जी चौक स्थित रघुनाथ मंदिर में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। कलाकारों और साहित्यकारों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
कलाकारों ने कहा कि भारतीय वाद्य यंत्र तबले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले उस्ताद जाकिर हुसैन एक कलाकार ही नहीं, बल्कि कला क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत थे। जिन्होंने तबला वादन में अपने कौशल के दम पर तीन बार ग्रैमी अवार्ड के साथ वर्ष 1998 में पद्मश्री, वर्ष 2002 में पद्मभूषण और वर्ष 2023 में पद्म विभूषण का सम्मान हासिल किया। डोगरी साहित्यकार डॉ. परमजीत शर्मा ने बताया कि उस्ताद जाकिर हुसैन के पिता उस्ताद अल्ला रखा कुरैशी का जन्म जम्मू संभाग के फगवाल गांव में हुआ था जो आज सांबा जिला में स्थित है। लिहाजा संभाग के कलाकारों को उनके निधन से बहुत दुख पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि तबला और उस्ताद जाकिर हुसैन के बीच अगर संबंधों की बात की जाए तो वह दोनों एक-दूसरे के पूरक थे। क्योंकि अगर तबले ने उनको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी, तो उस्ताद जाकिर हुसैन के कारण ही पूरे विश्व में भारतीय वाद्य यंत्र तबले को पहचान मिली। वहीं, करतार वर्मा ने कहा कि ऐसे कलाकार सदियों में पैदा होते हैं। वह तबला वादन से जुड़े कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेंगे। श्रद्धांजलि समारोह में कवि विजय शर्मा, डॉ. नरेंद्र सिंह जसोटिया, बंटी अलमस्त, विनय जसवाल, रोमेश भारती, युगांत शर्मा सहित कई अन्य कलाकार मौजूद रहे।