औद्योगिक इकाइयों के प्रदूषण साथ साथ पंजाब में पराली जलने का दिख रहा असर
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। इस बार दिवाली से पहले ही कठुआ की फिजा जहरीली हो गई है। पिछले लगभग डेढ़ सप्ताह से कठुआ के निचले इलाकों में हवा में एयर क्वालिटी इंंडेक्स बुरी तरह से बिगड़ा हुआ है।
फसलों की कटाई, छंटाई, पंजाब में पराली जलाने के साथ-साथ जिले में बड़े पैमाने पर प्रदूषण उगल रही बेलगाम इकाईयों ने लोगों की सेहत खराब करने का काम शुरू कर दिया है। जीएमसी के विशेषज्ञों की मानें तो औद्योगिक क्षेत्र से सटे क्षेत्रों से पिछले कुछ समय में दमा रोग के मामलों में बढ़त देखी गई है। इसमें वो लोग ज्यादा प्रभावित हैं, जो हटली मोड़ और इसके आसपास के इलाकों में रहते हैं।
कॉपरनिकस एटमासफेयर मॉनिटरिंग सर्विस के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। कठुआ में सोमवार को एक्यूआई 337 दर्ज किया गया, पीएम 2.5 की मात्रा 231.8 माइक्रो ग्राम पति क्यूबिक मीटर जबकि पीएम 10 की मात्रा 170 माइक्रो ग्राम से अधिक पाई गई। इससे पहले 23 अक्तूबर को को पीएम 2.5 की मात्रा 228.72 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज की गई है। हीरानगर में यह आंकड़ा 221.89 रहा है। 22 अक्तूबर को कॉपरनिकस एटमासफेयर मॉनिटरिंग सर्विस के आंकड़ों के अनुसार कठुआ शहर की फिजा में 171.39 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पीएम 2.5 की मात्रा दर्ज हुई। पीएम 10 भी पीछे नहीं। सौ माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक तय पैमाने को पार कर यह भभी 130 के पार हो गया है। 20 अक्तूबर को कठुआ में पीएम 2.5 की मात्रा 157.32 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज की गई।
नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स के आधार पर कॉपरनिकस एटमासफेयर मॉनिटरिंग सर्विस के 23 अक्तूबर की सुबह आंकड़ों में एयर क्वालिटी इंडेक्स बेहद खराब 339 दर्ज किया गया, हीरानगर में भी एक्यूआई 337 दर्ज किया गया। इससे पहले 20 अक्तूबर को एक्यूआई 308 दर्ज किया गया था। जीएमसी कठुआ के विशेषज्ञ डॉ. मानिक महाजन ने बताया कि मौसम में हो रहे बदलाव से पिछले कुछ दिनों में दमे के रोगियों में दिक्कत बढ़ी हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्ष में कठुआ औद्योगिक क्षेत्र और इससे सटे इलाकों में दमा रोगियों की संख्या काफी बढ़ी है। रूटीन में आने वाले मामलों की केस हिस्ट्री से पता चलता है कि गोविंदसर, हटली मोड़ और खास तौर से औद्योगिक क्षेत्रों के भीतर रहने ओर समय बिताने वाली आबादी में दमा रोगी बढ़ रहे हैं।
साप्ताहिक स्तर पर औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण की जांच करने के बाद भी जिले में तैनात प्रदूषण नियंत्रण विभाग सफेद हाथी साबित हो रहा है। शाम ढ़लने से लेकर सुबह सरकारी कार्यालय खुलने से पहले जिले में बड़े पैमाने पर औद्योगिक इकाईयां जहरीली हवा उगलती हैं। रेलवे रोड पर सीमेंट समेत अन्य फैक्टि्रयों से निकलने वाले धुंए ने लोगों का जीना मुहाल किया हुआ है। जन सेवा संस्थान के अध्यक्ष शशि शर्मा ने बताया कि रेलवे रोड से सफर करने वालों के लिए यह मार्ग नर्क बन चुका है। सुबह धूल के कन गले में चुबते हैं और लोग आंखें मलने को मजबूर हो जाते हैं। लेकिन जो लोग इसके आसपास रहते हैं उनके हालात बद से बद्तर हैं। बीमारियों से जूझ रहे गरीब तपके के लोगों के पास घुट घुट कर मरने के अलावा कोई चारा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने धूल और प्रदूषण फांकने वाली इकाईयों पर आंखें मूंदी हुई हैं। उन्होंने रोष प्रकट करते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग आंकड़ाें को भी सार्वजनिक नहीं करता है लिहाजा लोगों को यह भी नहीं पता चल पा रहा है कि खतरा कितना बढ़ चुका है। सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। चूंकि कठुआ को औद्योगिक हब बनाते बनाते, यहां की आबादी को ही बीमारियां से न भर दिया जाए।
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औद्योगिक क्षेत्र के भीतर नहीं अब प्रदूषण विभागीय दफ्तरों की छत पर नापा जा रहा है
वर्ष 2010 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने कठुआ में औद्योगिक प्रदूषण को मापने के लिए संयंत्र हटली मोड़ से सटे औद्योगिक क्षेत्र के बीचों बीच स्थापित किया था। लेकिन प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने अब इसे वहां से शिफ्ट कर मरोली से सटे अपने कार्यालय की छत पर लगा दिया है। इस इलाके में ज्यादातर इकाईयां प्रदूषण फैलाने वाली नहीं हैं। सूत्रों की मानें तो इसके लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति भी नहीं ली गई है। वहीं जिले में आया औद्योगिक प्रदूषण नापने के लिए दूसरा संयंत्र शहर के बीचों बीच वन विभाग के हरियाली से घिरे छत पर स्थापित कर दिया गया है। हैरत इस बात की है कि साप्ताहिक स्तर पर इन दोनों ही जगह से हासिल होने वाले डाटा का मीन डाटा उच्च अधिकारियों को भेजा जाता है। ऐसे में यह दोनों ही संयंत्र सही जगह पर नहीं होने से लोगों की जान से खिलवाड़ का जरिया बन चुके हैं।
निजी इकाई के यहां एक संयंत्र लगा था, उसने आपत्ति जताई थी और बिजली भी नहीं दे रहा था। इसके बाद संयंत्र को मरोली स्थित औद्योगिक क्षेत्र में विभाग के कार्यालय में स्थापित करवा दिया गया है। दूसरा उपकरण कठुआ शहर में व्यवसायिक और रिहायशी इलाकों में प्रदूषण का पैमाना जांचता है। इन दोनों की संयुक्त रिपोर्ट के आधार पर साप्ताहिक डाटा तैयार किया जाता है।
सुरेंद्र त्रिपाठी, जिला प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी