आयुष चिकित्सा अधिकारी दे रहे ओपीडी सेवाएं
रामकोट। उपजिला मुख्यालय बिलावर से 40 किलोमीटर दूर स्थित प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) रामकोट में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वीकृत चिकित्सा अधिकारियों की तीन पद लंबे समय से रिक्त पड़े हुए। जिसके चलते स्थानीय लोगों खासकर गर्भवती महिलाओं को उपचार के लिए उपजिला अस्पताल बिलावर जाने को मजबूर हो रहे हैं।
लगभग 30 गांव के ऊपर स्थापित की गई पीएचसी एक मात्र अस्पताल है। जिसमें रामकोट तहसील के 21 पंचायतों, मजालता तहसील के सात गांव सूँडला, बालपुर, गढ़-पांजियां, बबे, नक्की, अमाडा और जिला सांबा के दो गांव को वर्तमान स्वास्थ्य सुविधा मुहिया होती है। पिछले दो सालों से अस्पताल में कोई भी चिकित्सा अधिकारी न होने से वर्तमान में ओपीडी और इमरजेंसी सेवा आयुष चिकित्सा अधिकारी और दंत चिकित्सक के सहारे चल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगभग एक दशक पहले इलाके में प्राथमिक स्वास्थ्य की सौगात मिली थी। जिससे लोगों को यहां बेहतर इलाज की उम्मीद थी, लेकिन लंबे समय से चिकित्सा अधिकारी की तैनाती न होने की वजह से लोगों की उम्मीदें फिर टूट गई। यहां की स्वास्थ्य सेवाएं राम भरोसे ही चल रही है। पीएचसी में मौजूदा स्टाफ सदस्य मरहम पट्टी और टीकाकरण की ही सुविधा दे पा रहे है।
स्थानीय पुरुषोत्तम सिंह, देव राज और प्रवीन कुमार का कहना है कि अगर संबंधित विभाग डॉक्टरों की व्यवस्था नहीं कर सकता था तो अस्पताल का सिर्फ ढांचा बनाने की क्या जरूरत थी। पीएचसी में डॉक्टर न होने से लोगों को आज भी 40 किलोमीटर दूर जा कर उपजिला अस्पताल बिलावर में इलाज लेना पड़ रहा है। वहीं, पीएचसी निर्माण हुए एक दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी यहां अल्ट्रासाउंड की कोई सुविधा मौजूद नहीं है। एक्सरे सुविधा भी सप्ताह में सिर्फ एक दिन वीरवार के दिन ही उपलब्ध होती है। अगर इलाके कोई भी दुर्घटना घटती है तो मरीजों को तुरंत रेफर कर दिया जाता है।
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ब्लॉक बिलावर में चिकित्सा अधिकारियों की कमी को लेकर जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी के माध्यम से समय समय पर सरकार के संज्ञान ने ला चुके है। उम्मीद है कि डॉक्टरों के रिक्त पदों को जल्द भरा जाएगा, ताकि लोगों को पंचायत स्तर में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
.......हरबिंदर सिंह, बीएमओ बिलावर।