संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) विजयपुर ने हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार लीड लेस पेस मेकर प्रत्यारोपण की सफल प्रक्रिया पूरी की है। यह अत्याधुनिक प्रक्रिया एक ऐसे मरीज पर की गई, जो पहले लगाए गए पारंपरिक पेस मेकर की पॉकेट संक्रमण की गंभीर समस्या से जूझ रहा था।
पारंपरिक पेस मेकर में हृदय तक जाने वाली इलेक्ट्रिकल लीड और त्वचा के नीचे एक सर्जिकल पॉकेट में बैटरी युक्त जनरेटर लगाया जाता है। संक्रमण होने की स्थिति में दोबारा पेस मेकर लगाना जोखिम भरा हो सकता है। इस चुनौती को देखते हुए डॉक्टरों ने नई तकनीक वाले लीड लेस पेस मेकर का इस्तेमाल किया।
यह छोटा कैप्सूल जैसा पेस मेकर जांघ की नस फेमोरल वेन के माध्यम से सीधे हृदय के दाएं वेंट्रिकल में स्थापित किया जाता है। इसमें न तो छाती पर चीरा लगाने की जरूरत होती है और न ही त्वचा के नीचे कोई पॉकेट या लीड लगाने की आवश्यकता पड़ती है।
यह जटिल हृदय प्रक्रिया कार्डियोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जुबैर फारूक और डॉ. मयंक सैनी ने विशेषज्ञ कार्डियक नर्सों और तकनीकी टीम के सहयोग से सफलतापूर्वक पूरी की।
वहीं संक्रमण के मूल स्रोत को खत्म करने के लिए प्लास्टिक सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राहुल गोर्का ने संक्रमित पेस मेकर पॉकेट की सर्जिकल डिब्राइडमेंट और रिकंस्ट्रक्टिव रिपेयर प्रक्रिया को अंजाम दिया, जिससे संक्रमित ऊतकों को हटाकर मरीज को गंभीर संक्रमण से सुरक्षित किया जा सका।
एम्स जम्मू प्रशासन ने इस उपलब्धि को संस्थान में विकसित हो रही अत्याधुनिक इंटरवेंशनल कार्डियक सुविधाओं का परिणाम बताया। एम्स विजयपुर संस्थान के निदेशक प्रो. डॉ. संजीव सिन्हा के नेतृत्व और मार्गदर्शन की सराहना करते हुए कहा गया कि अब जम्मू-कश्मीर के मरीजों को इस तरह के जटिल उपचार के लिए प्रदेश से बाहर जाने की जरूरत कम होगी। दोहरी प्रक्रिया के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और वह बिना किसी जटिलता के डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से स्वस्थ हो रहा है।