- प्राॅम और एनपीके खरीदने को मजबूर हो रहे किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले की 62 हजार हेक्टेयर खेती योग्य भूमि के लिए इस बार सरकार की ओर से उपलब्ध करवाई गई खाद नाकाफी हो गई है। ऐसा तब है जब सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के दावे कर रही है।
इस बीच मुनाफाखोरी करते हुए कई जगह किसानों को डीएपी की जगह डीएपी के दाम पर प्रॉम, फास्फेट रिच आर्गेनिक मैटर बेचने के मामले भी सामने आ रहे हैं। दरअसल, पंजाब के साथ सटे कठुआ जिले से इसकी ब्लैक मार्केटिंग की आशंका से भी इंकार नहीं किया जाता है। कृषि विभाग के मुताबिक कठुआ जिले की जरूरत 28 सौ मिट्रिक टन डीएपी खाद की है जबकि इसमें से दो हजार मिट्रिक टन उपलब्ध करवाई जा चुकी है। 71 फीसदी के लगभग उपलब्धता के बाद भी किसान डीएपी की जगह प्रॉम, एनपीके, नाइजट्रोजन फॉस्फेट और पोटाशियम का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।
किसानों की मानें तो ऐसी संभावना है कि कठुआ जिले के लिए अलॉट कोटे में से डीएपी की कालाबाजारी पंजाब में हो रही है। ऐसे में इसकी जांच करवाने और डीलरों के स्टॉक के साथ मिलान करवाने की मांग की गई है। खाद डीलर डीएपी जारी करते समय पीओएस के माध्यम से इसे जारी करते हैं और इसके लिए किसानों की आधार जांच भी की जाती है। लेकिन इस व्यवस्था की जांच नियमित रूप से होनी चाहिए कि क्या डीलरों ने खाद यहां के किसानों को ही बेची है। कठुआ के खाद डीलर रुभम शर्मा ने बताया कि जिले में जितने भी खाद डीलरों की मांग थी उससे आधा डीएपी खाद मिली है। खपत हो चुकी है और सप्लाई नहीं मिल रही।
कोट..
जिले में 70 प्रतिशत के लगभग डीएपी की आपूर्ति अब तक हो चुकी है। शेष किसान प्रॉम और एनपीके का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रॉम तय दाम पर ही बेची जाए और खाद को लेकर किसानों को कोई दिक्कत न आए इसे लेकर डीलरों को निर्देश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही सब डिवीजन स्तर के अधिकारियों को नियमित नजर रखने की हिदायत भी जारी की गई है।
- संजीव राय, मुख्य कृषि अधिकारी कठुआ