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Kathua News: 13 साल बाद अंधेरा होगा खत्म, फिर शुरू होगी जलविद्युत परियोजना

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सेवा परियोजना का जलाशय जहां से नहर के जरिए टरबाइन तक पानी पहुंचाया जाता हैफाइल फोटो
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परियोजना को पीपीपी मोड पर चलाने की तैयारी में है प्रदेश सरकार, इसी महीने शुरू हो जाएगी निविदा प्रक्रिया
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। पिछले 13 साल से ठप पड़ी सेवा तीन जलविद्युत परियोजना को एक बार फिर शुरू करने की तैयारी है। आईआईटी रुड़की की ओर से तैयार डीपीआर के बाद अब इस परियोजना को प्रदेश सरकार पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मोड पर चलाने की तैयारी में है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो परियोजना के लिए इसी महीने निविदा प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।
जम्मू कश्मीर सरकार की इस पनबिजली परियोजना के जरिये 2013 तक हर घंटे लगभग 72 हजार रुपये की बिजली का उत्पादन होता था, जो बसोहली और बनी क्षेत्र को मिलती थी। बाद में महानपुर ग्रिड में लाइन के जुड़ जाने से बिलावर को भी बिजली मिलने लगी। रावी दरिया से सटे माश्का गांव में स्थित सेवा तीन विद्युत परियोजना की क्षमता नौ मेगावाट है। यह प्रदेश के पाॅवर डेवलपमेंट कारपोरेशन की अपनी परियोजना है। यहां सामान्य तौर पर रोजाना 50 से 60 हजार यूनिट बिजली तैयार होती है।
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2013-14 में आई भीषण बारिश और बाढ़ ने निरीक्षण मार्ग और नहर के एक हिस्से को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके चलते पॅावर हाउस को पूरी तरह बंद करना पड़ा। इस परियोजना को पुनर्जीवित करने के लिए 66.43 करोड़ रुपये की बहाली योजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत आगे बढ़ाई जा रही है। सेवा तीन परियोजना रन-ऑफ-रिवर परियोजना, जिसमें 3-3 मेगावॉट की तीन टरबाइन लगाई गई हैं। परियोजना का निर्माण 1993 में शुरू हुआ और 25 जून 2002 को संचालित की गई थी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, परियोजना की मरम्मत और बहाली के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का कार्य आईआईटी रुड़की को सौंपा गया था। संस्थान ने 2022 में रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें लागत 66.43 करोड़ रुपये आंकी गई। केंद्र शासन सुधार एवं नवाचार परिषद (सीआईटीएजी) ने अप्रैल 2025 की बैठक में सुझाव दिया कि परियोजना को पीपीपी मोड में पुनर्विकसित किया जाए। इसके बाद सितंबर 2025 में आईआईटी रुड़की ने डीपीआर का संशोधन कार्य शुरू किया है और सूत्रों की मानें तो डीपीआर बनकर तैयार है।
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इस संबंध में बसोहली के विधायक ठाकुर दर्शन सिंह ने कहा कि विधानसभा में भी इस परियोजना को फिर से शुरू करने के लिए आवाज उठाई गई थी। यह परियोजना जिले में गर्मी के सीजन में बिजली की भारी मांग के बीच नौ मेगावॉट बिजली का सहयोग दे सकती है। इससे कई इलाकों को राहत मिलेगी।
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