यदि विद्यार्थियों को स्कूल में ही योग की शिक्षा मिलने लगे और जीवन को तनाव मुक्त बनाने के लिए बाकायदा विषय पढ़ाया जाए तो शायद आपराधिक घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है। ऐसा आने वाले अकादमिक शिक्षा सत्र में हो सकता है। जिले में इसकी शुरुआत एक छोटे प्रोजक्ट के तौर पर कुछ दिनों के भीतर ही हो जाएगी। इसके लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी और जिला युवा सेवा एवं खेल विभाग के अधिकारियों को डिवकाम शांतमनु ने निर्देश जारी कर दिए हैं।
रविवार को दोनों विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर इस पर चर्चा करने के बाद उन्होंने बताया कि योग शिक्षा को स्कूलों में लागू करने के लिए उन्होंने स्कूलों के आंकडे़ और वर्तमान में विषयों के साथ अतिरिक्त कार्यक्रमों की सूची मंगवाई है।
उन्होंने कुछ दिनों में ही निजी और सरकारी स्कूलों की एक सूची तैयार करने को कहा है ताकि शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ बैठक कर योग विषय को लागू करने पर सहमति बनाई जा सके। उन्होंने कहा कि बढ़ते अपराधों पर रोक लगाने के लिए तनाव मुक्त होना सबसे अहम है और वैज्ञानिक तौर पर यह साबित भी हो चुका है कि योग से तनाव पर लगाम लगाई जा सकती है।
ऐसे में यदि स्कूली स्तर से ही इसे लागू किया जाए तो बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि तीन दिन के बाद उन्हें जो सूची मिलेगी उन स्कूलों में योग विषय को एक प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाएगा। इसके बाद जो नतीजे सामने आएंगे उसे शिक्षा विभाग और सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
इसके बाद विषय को राज्य भर में लागू करने के लिए मुहीम शुरू की जाएगी। इसके लिए शिक्षक कहां से आऐंगेेे या फिर पहले से ही इन विषयों की शिक्षा दे रहे शिक्षकों को नियुक्त किया जाएगा यह सब बातें रिपोर्ट आने के बाद तय की जाएंगी।