न्यायिक मजिस्ट्रेट महानपुर ने पांच साल पुराने मारपीट के मामले में आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने जिन गवाहों को पेश किया, उनमें ज्यादातर पीड़ित के सगे संबंधी हैं।
आरोपी शिकायतकर्ता के घर में घुसा था यह साबित नहीं हो पाया। इसके अलावा मेडिकल रिपोर्ट और मामला दर्ज करने के समय में विरोधाभास था। जांच अधिकारी ने मामले में एक भी स्वतंत्र गवाह से पूछताछ नहीं की है, जिससे मामले में संदेह पैदा होता है।
प्रकरण 11 जनवरी 2020 का है, जिसमें शिकायतकर्ता मदन लाल ने आरोप लगाया था कि आरोपी अजीत कुमार ने अपने घर में निर्माणकार्य के दौरान उसके घर के बाहर गली से निर्माण सामग्री और मिक्सर मशीन ले जाने की कोशिश की थी। शिकायतकर्ता ने आरोपी से कहा कि संकरी गली से मिक्सर मशीन ले जाने से उसके घर को नुकसान पहुंचेगा। इस पर आरोपी भड़क गया और कथित तौर पर उसके घर में घुसकर उसे लात-घूंसों से मारा था, जिससे मदन लाल की नाक पर गंभीर चोट आई। पीड़ित ने इसकी शिकायत पुलिस में की। पुलिस ने जांच करने के बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर 28 जून 2021 को कोर्ट में चालान पेश किया। कोर्ट में आरोपी ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमा चलाने की मांग की गई थी।
इसके बाद कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को गवाहों को पेश करने का निर्देश दिया। अभियोजन पक्ष ने कुल छह गवाहों को पेश किया। इसमें शिकायतकर्ता, उसके रिश्तेदार, पत्नी और डॉक्टर शामिल थे।
हालांकि मेडिकल रिपोर्ट में नाक की हड्डी टूटने की पुष्टि हुई थी लेकिन अदालत ने पाया कि गवाह ज्यादातर शिकायतकर्ता के परिजन थे और स्वतंत्र गवाहों को शामिल नहीं किया गया।
गवाहों द्वारा घटनास्थल को लेकर अलग-अलग बयान सामने आए। कोर्ट ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी करने का फैसला सुनाया। इसके अलावा कोर्ट ने आरोपी के जमानती और व्यक्तिगत बॉन्ड को खारिज कर मामले का निपटारा कर दिया।