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पाकिस्तान सीमा पर बदली तस्वीर: 'जहां से भारत दिखता है, वहीं से विकास की नई कहानी होगी शुरू', एलजी मनोज सिन्हा

Fri, 21 Aug 2026 11:05 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, कठुआ

सार

कठुआ के पाकिस्तान सीमा से सटे छह गांवों में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत विकास की नई शुरुआत हुई है, जिससे सुरक्षा के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
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करोल कृष्णा में सुरक्षाबल के जवानों से बातचीत करते उपराज्यपाल। - फोटो : एजेंसी
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विस्तार
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पाकिस्तान सीमा से सटे कठुआ के गांव अब भारत की सुरक्षा, संकल्प और विकास की पहली पंक्ति बन रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब बसे करोल कृष्णा गांव पहुंचकर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सीमा के पास के गांवों की बदलती तस्वीर को देश की नई ताकत से जोड़ा। उन्होंने कहा कि ये गांव भारत के आखिरी गांव नहीं, बल्कि पहले गांव हैं। यहीं से भारत दिखाई देता है और यहीं से देश की शुरुआत होती है।

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करोल कृष्णा, रठुआ, गुज्जर चक, गजनाल, बोबिया और कड़ियाला को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के दूसरे चरण में शामिल किया गया है। सामरिक रूप से इन रणनीतिक गांवों में विकास को गति देने के साथ ही सरकार का जोर यहां की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करने पर है। ये सभी गांव भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थित हैं।

उपराज्यपाल ने कहा कि दशकों तक ‘सीमा’ शब्द के साथ दूरी और उपेक्षा का भाव जुड़ा रहा। अब तस्वीर बदल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमावर्ती गांव विकास की मुख्यधारा के केंद्र में आ गए हैं। उन्होंने कहा, भारत के विकास की कहानी लिखी जाएगी तो उसका पहला अध्याय करोल कृष्णा जैसे गांवों से शुरू होना चाहिए, जहां भारत की सीमा सांस लेती है और तिरंगा लहराता है।
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सीमा पर तेजी से बदल रही तस्वीर
अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे कठुआ के इन गांवों के लिए विकास अब सिर्फ सड़क, बिजली और सुविधाओं का सवाल नहीं, बल्कि सुरक्षा और स्थायित्व से भी जुड़ा है। सीमावर्ती आबादी जितनी मजबूत और आत्मनिर्भर होगी, सीमा उतनी ही मजबूत होगी। इसी सोच के तहत सरकार सीमा गांवों में बुनियादी सुविधाओं के साथ रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही है। उपराज्यपाल ने कहा कि विकास और सुरक्षा अलग-अलग लक्ष्य नहीं, बल्कि एक ही लक्ष्य के दो स्तंभ हैं। सुरक्षित गांव ही समृद्ध गांव बन सकता है और समृद्ध गांव ही आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान दे सकता है।

216 सीमा गांव सड़क से जुड़े
उपराज्यपाल ने कहा कि 2019 के बाद कठुआ जिले के सभी 216 सीमावर्ती गांव सड़क से जुड़ चुके हैं और पूर्ण विद्युतीकरण हो चुका है। दूरसंचार और टेलीविजन की सुविधा भी अब हर घर तक पहुंच रही है।

सीमा परिवारों की सुरक्षा के लिए दो हजार से अधिक व्यक्तिगत और सामुदायिक बंकर बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में गरीबी में उल्लेखनीय कमी आई है, शहरों की ओर पलायन आधा हुआ है और ग्रामीण आय में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रोजगार के अवसर बढ़े हैं। बेरोजगारी पहले के मुकाबले करीब आधी रह गई है।
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