कठुआ। मौसम विभाग के अनुसार मानसून कम होगा और इस बार मानसून राज्य में जुलाई के पहले हफ्ते तक ही आएगा। बाढ़ नियंत्रण विभाग की तैयारी लेकिन अभी तक शून्य ही है। बाढ़ नियंत्रण पर चर्चा के अतिरिक्त जमीनी स्तर पर किसी योजना को अमल में नहीं लाया गया है। इससे भी बढ़कर विभाग के पास बाढ़ नियंत्रण के लिए जरूरत की भी धनराशि नहीं है।
हर साल विभाग को बाढ़ नियंत्रण के लिए चार से पांच लाख रूपए की आवश्यकता पड़ती है। विभाग को पिछले साल भी धन नहीं मिल पाया था जिसके कारण बचे हुए और खराब सामान से ही विभाग ने काम चलाया था लेकिन सरकार की ओर से धन न मिलने से बाढ़ ने जो नुकसान किया वह इस बार दो गुनी राशि से पूरा हो सकेगा। विभाग को इस साल की धनराशि ही नहीं मिली है तो दो सालों के नुकसान को कैसे पूरा किया जाएगा। ऐसे में इस बार भी बाढ़ से नुकसान तय है। गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों से उज्ज और नाज नालों में भारी बाढ़ के कारण नुकसान हो चुका है। यहां तक कि चंग क्षेत्र में बनाया गया बांध भी बह गया था जिसे अब तक पूरा नहीं किया जा सका है।
कितने धन की है आवश्यकता
अगर विभागीय आंकड़ों की बात करें तो विभाग को इस वर्ष 12 लाख रुपये की आवश्यकता तो पिछले तीन साल के नुुकसान को पूरा करने के लिए है। इसमें भी मुआवजे की राशि शामिल नहीं है। केवल विभागीय सामान को हुए नुकसान की भरपाई के लिए ही इस धन की जरूरत है लेकिन केवल इस वर्ष के लिए विभाग को पांच लाख रुपये की आवश्यकता है जिससे करेट और अन्य आवश्यक सामान की खरीद की जा सके।
पुलों को सबसे अधिक खतरा
राष्ट्रीय राजमार्ग और विभिन्न गांवों को जाने वाले रास्तों पर बने पुलों को बाढ़ के कारण सबसे अधिक खतरा होता है। पिछले साल उज्ज में बाढ़ के कारण वाहनों को पुल के दोनों ओर बाढ़ कम होने तक रोकना पड़ा था। वहीं शेरपुर गांव के पुल के बेस में बने करेट बह गए थे। ऐसे में इस बार करेट डालने के लिए राशि नहीं मिल पाई है। जिसके कारण पुलों का बेस बनाए रखना बड़ी चुनौती बन चुका है।